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भगवान महावीर की जन्मस्थली पर जन्म लेने वाले भाग्यशाली: भद्रबाहु

भगवान महावीर की जन्मस्थली पर जन्म लेने वाले भाग्यशाली: भद्रबाहु

भगवान महावीर के जन्म क्षेत्र में जन्म लेने वाले सभी लोग भाग्यशाली हैं। धन्य है यहां की धरती जहां भगवान महावीर का अवतरण हुआ था। ये बातें जैन मुनि आचार्य भद्रबाहु सागरजी ने गुरुवार को प्राकृत जैनशास्त्र व अहिंसा शोध संस्थान बासोकुंड में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जब लोग भूख से मरने लगे तो भगवान के पास जाकर भूख मिटाने का उपाय पुछा। तब भगवान ने असी, मसी, कृषि, शिल्प, विद्या और वाणिज्य ये छह विद्याओं की शिक्षा देकर लोगों को कर्म करने का उपदेश दिया था। प्रथम सत्र में आयोजित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के जैन बौद्ध दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रद्युम्न शाह ने कहा कि श्रमण शब्द में श्रम, शमन और समता का भाव अंतर्निहित है, जो श्रम कर सके, इंद्रियों का शमन कर सके और सब जीवों के प्रति समता का भाव रख सके वही श्रमण कहलाता है।

 दूसरे सत्र में आयोजित डॉ. हीरालाल जैन स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली के मुक्त स्वाध्यायपीठ में कार्यरत डॉ. रजनीश शुक्ल ने कहा कि प्राकृत भाषाएं बहुत ही समृद्ध है। इसकी शब्दावली का आधुनिक भारतीय भाषाओं की समृद्धि के लिए बहुत बड़ा योगदान है। व्याख्यानमाला में अध्यक्षीय संबोधन के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. ऋषभचंद्र जैन ने कहा कि जैनधर्म कर्मवारी संस्कृति का पोषक है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सकर्म करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें देखकर और समझ कर अपना आचरण करना चाहिए जिससे जीवन में कभी बाधा नहीं आएगी। मंगलाचरण, धन्यवाद ज्ञापन व संचालन संस्थान की व्याख्याता डॉ. मंजूबाला ने की। मौके पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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  • Web Title:Fortunate to be born on the birthplace of Lord Mahavira Bhadrabahu