
हम बिहार के लोग :: सात समंदर पार इस त्योहार चुनाव में छाया बिहार
संक्षेप: मुजफ्फरपुर में प्रवासी बिहारियों का उत्साह छठ पूजा और विधानसभा चुनाव के लिए दोगुना है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया और नाईजीरिया में रहने वाले प्रवासी चुनावी चर्चाओं में भाग ले रहे हैं। वे अपनी राय सोशल...
फोटो : सतीश जी -लोकआस्था और लोकतंत्र का महापर्व दोनों साथ होने से उत्साह दोगुना -अमेरिका, आस्ट्रेलिया, नाईजीरिया रहनेवालों में सियासी दिलचस्पी खूब मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता : एकतरफ लोकआस्था का महापर्व छठ है तो लोकतंत्र का महापर्व चुनाव भी। दोनों पर्व के बीच ज्यादा अंतराल नहीं है। सात समंदर पार रहने वाले प्रवासियों के लिए दिपावली संपन्न होने के बाद छठ पूजा शेष है तो विधानसभा चुनाव विशेष। लिहाजा, छठ की छटा के साथ बिहार चुनाव को लेकर उनका उत्साह उतने ही चरम पर है। प्रवासी उसी हिसाब से अपने घर रुकने का शिड्यूल बना रहे हैं। चुनावी चर्चा में उनकी दिलचस्पी के रंग निराले हैं।
टिकट बंटवारे में सियासी उठा-पटक के दौर में भी उनकी नजरें टिकी हुई थीं। अब बिहार के प्रवासी चुनाव में कैसे मतदान सकेंगे, क्या वे वोट के अधिकारी हैं? वे यहां के विधायक व बनने वाली सरकार से क्या चाह रखते हैं ऐसे कई सवालों को लेकर अपनी राय सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, नाईजीरिया में रहने वाले परिवारों से जुड़े रंजीत पूर्वे का कहना है कि चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही जब कभी इन लोगों से बातें हुईं सब यहीं पूछते कि चुनावी माहौल कैसा है। कौन-कौन पार्टी और प्रत्याशी इस बार मुकाबले में हैं। सोशल मीडिया पर चुनावी खुमार खूब छाया हुआ है। अमेरिका के शिकागो शहर में शिशिर रंजन व रश्मि रंजन हों या नाइजीरिया में एग्रो कमोडिटी कंपनी में एक्सपोर्ट डिर्पाटमेंट के जीएम सीतामढ़ी शहर के आशुतोष कुमार झा का कहना है कि उनके आस-पास रहने वाले तमाम बिहारी चुनावी रंग में रंग चुके हैं। जब भी पूरा परिवार इकट्ठा होता है वहां सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो जाता है। चुनावी चर्चओं में हंसी के हंसगुले और व्यंग्यवाण भी खूब छूटते हैं। कोई एनडीए को जीताने की बात करता है तो कोई महागठबंधन को। अब तो जन सुराज भी चर्चा में है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सतरंगी चुनावी रंग अमेरिका में ही रहने वाले नानपुर के प्रो. चंदन झा का कहना है कि चुनाव आयोग ने इस बार कई नए प्रयोग किए हैं यह जानने के बाद वहां रहने वाले बिहारी प्रवासी जिन्होंने उस देश की अभी नागरिकता नहीं ली है, इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं कि यह जानने की उत्सुकता भी है। अमेरिका के शिकागो शहर में बसे चंद्र शेखर सिन्हा, प्रभा सिन्हा, स्निग्धा, जाह्नवी सक्सेना, नवनीत रंजन श्रीवास्तव, अंजलि श्रीवास्तव, बीपी श्रीवास्तव, प्रीति सक्सेना, अर्पणा प्रियदर्शिनी, परिधि रंजन, सात्विक रंजन, नीतिका श्रीवास्तव, जियांशी श्रीवास्तव व नेली कुमार बताते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सतरंगी चुनावी रंग देखा जा सकता है। सब अपना उत्साह बखूबी जाहिर कर रहे हैं, वाट्सएप कॉल के जरिये घर-परिवार व शुभचिंतकों से पल-पल की खबरों से बावस्ता हो रहे हैं। बिहार में पलायन रूके तो विकास को पंख लगे विदेशों में रहने वाले बिहार के अधिकतर लोगों का यहीं कहना है कि बिहार में पलायन रूके तो विकास को पंख लगे। बिहार की काफी सारी प्रतिभाएं विदेशों में अपना हुनर दिखा रही हैं। वहीं पैसे कमाते हैं लोग और बहुत सारा खर्च वहीं पर कर भी देते हैं। यहीं पैसा अगर बिहार में खर्च होता तो निश्चित रूप से उसका विकास तेजी से होता। बहरहाल, पर्व-त्योहार में घर आने वाले प्रवासियों के लिए दोहरी खुशी का अवसर है। कुछ प्रवासी ऐसे भी हैं जो छठ पूजा बीतते ही उन्हें परदेस लौटने की मजबूरी होगी, लेकिन वे चुनाव तक रूकने का मन बना रहे हैं।

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