क्रय केंद्रों पर कर्मी करें मदद, बिचौलियों पर लगे अंकुश तो किसान न हों परेशान
संक्षेप: मुजफ्फरपुर में किसान धान के सरकारी क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। बेमौसम बारिश और अधिकारियों की मनमानी के कारण किसानों को धान बेचने में कठिनाई हो रही है। सरकारी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, और बिचौलिये इसका लाभ उठा रहे हैं। किसानों ने जागरूकता बढ़ाने की मांग की है।
मुजफ्फरपुर। नियमों की बंदिश, जानकारी का अभाव और अफसरों की मनमानी के कारण जिले के किसान धान के सरकारी क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक तो बेमौसम बारिश से आई बाढ़ ने खड़ी फसल को तबाह कर दिया। दूसरा धान में नमी सहित कई कारण बताकर उन्हें सरकारी क्रय केंद्रों से लौटाया भी जा रहा है। ऐसे में बिचौलिये इसका फायदा उठा रहे हैं। स्थिति यह बन गई है कि जिले की 253 प्राथमिक कृषि साख सहयोग समितियों (पैक्स) और आठ व्यापार मंडलों के जरिये शुरू सरकारी दर पर धान खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

किसान धान क्रय केंद्रों तक पहुंच ही नहीं रहे हैं, जिससे इन दिनों वहां सन्नाटा पसरा रहता है। किसानों का कहना है कि अधिकारी सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए प्रचार-प्रसार कर जागरूक करें तो वे सरकारी क्रय केंद्रों पर आसानी से धान बेच सकें। राज्य सरकार ने एक नवंबर से न्यूनतम समर्थन दर पर धान खरीद के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण किसान अपना धान बेचने के लिए खरीद केंद्रों पर पहुंचने से हिचक रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिले में भी इस साल खरीद की यह प्रक्रिया 253 प्राथमिक कृषि साख सहयोग समितियों (पैक्स) और आठ व्यापार मंडलों के माध्यम से शुरू कर दी गई है। इस बार जिले को अभी तक खरीदारी का लक्ष्य नहीं मिला है। इस कारण जिला सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने पिछले साल के संशोधित लक्ष्य के अनुसार ही धान खरीद का निर्देश दिया है। सरकार ने साधारण धान खरीद के लिए 2369 रुपये प्रति क्विंटल और ए ग्रेड के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की है। जिले के किसानों का कहना है कि पैक्स और व्यापार मंडल में धान की बिक्री वही किसान कर सकते हैं, जो कृषि विभाग के पोर्टल पर निबंधित होंगे, लेकिन इसको लेकर किसानों के बीच किसी भी तरह का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है और न किसानों को अपने पास के खरीद केंद्रों के बारे में कोई जानकारी है। कुछ किसानों ने क्रय केंद्रों पर तैनात कर्मियों के मनमाने रवैये की भी शिकायत की। कहा कि इस बार मौसम की बेरुखी के कारण धान की फसल चौपट हो जाने से भी कम लोग खरीद केंद्रों तक पहुंच पा रहे हैं। क्रय केंद्रों पर केवल बेहतर गुणवत्ता वाले धान ही खरीदे जा रहे हैं। ऐसे में उनके लिए अपनी उपज को बेच पाना मुश्किल लग रहा है। वहीं कुछ किसानों ने धान की सरकारी खरीद में बिचौलियों के हावी होने का भी आरोप लगाया। कहा कि बिचौलियों के कारण भी सामान्य किसान खरीद केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते हैं। वे सीधे बाहरी व्यापारी से मोल-भाव कर धान बेच ले रहे हैं।
बभनगामा पैक्स से जुड़े किसान शिवजी सहनी, विनोद कुमार ने बताया कि इस बार आई बाढ़ से धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। इससे उत्पादन में गिरावट तो आई ही, देर तक पानी लगने के कारण उपज की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। इस कारण खरीद केंद्र के कर्मी इसे नहीं ले रहे हैं। वहीं रवि कुमार, विरेन्द्र ठाकुर का कहना था कि खरीद केंद्रों पर दो से पांच किलो प्रति क्विंटल अतिरिक्त धान की मांग की जाती है। ऐसे में किसान सरकारी केंद्रों से दूरी बना रहे हैं। बताया कि इस साल बेमौसम बारिश के कारण धान की फसल में अभी नमी बची हुई है। अधिक नमी का बहाना कर भी खरीद केंद्रों पर प्रतिनियुक्त कर्मी और पैक्स संचालक धान की खरीदारी करने से मना कर दे रहे हैं।
अख्तेयारपुर पड़ेया पैक्स अध्यक्ष प्रशान्त परिमल और हरिशंकर मनियारी पैक्स अध्यक्ष सुनील कुमार मिश्र का कहना था कि किसानों को पिछले तीन वर्षों से उनकी उपज का बेहतर दाम खुले बाजार में मिल जा रहा है। बाहर के व्यापारी एमएसपी से डेढ़ से दो सौ रुपये अधिक कीमत पर किसानों से उनके घर जाकर धान की खरीद कर रहे हैं, जबकि पैक्सों तक जाने में किसानों को अपना बोरा और ढुलाई पर खुद का पैसा खर्च करना पड़ता है। इस तरह उनको प्रति क्विंटल 50 रुपये अतिरिक्त बच जाते हैं। ऐसे में वे पैक्सों या व्यापार मंडलों में बनाए गए खरीद केंद्रों तक आने से परहेज करते हैं। हालांकि इस बार मानसून की बेरुखी से पहले ही उत्पादन कम हुआ है। बड़े किसानों को छोड़ दिया जाए, तो छोटे और सीमांत किसानों के अलावा गैर रैयत के पास भी बेचने के लिए अधिक मात्रा में धान नहीं बचा है। इसका असर भी धान की सरकारी खरीद पर पड़ रहा है। पैक्स अध्यक्ष राजीव लोचन कुमार और सदस्य कृष्ण मुरारी पांडेय का कहना है कि सहकारिता विभाग ने किसानों से एमएसपी पर धान की खरीदारी के लिए कई नियम बनाए हैं, जिनमें से अधिकतर की जानकारी किसानों को नहीं है। इस कारण जब वे खरीद केंद्रों पर पहुंचते हैं तो कई बार मानक पर खरा नहीं उतरने वाली उपज को खरीदने से इंकार कर दिया जाता है। ऐसे में किसानों के पास घर वापस लौटने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं बचता है।
किसान अशोक ठाकुर, श्रद्धानंद ठाकुर और प्रेम रंजन इससे सहमति जताते हुए कहते हैं कि नियमों का हवाला देकर खरीदने से इंकार करना महज एक छलावा है, क्योंकि कई बार जिन पैकेट्स को खरीदने से इंकार कर किसानों को वापस भेज दिया जाता है, वही उपज बिचौलिए के माध्यम से पैक्स खरीद लेते हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रिया में बिचौलियागिरी हावी होने का आरोप लगाया। झपहां पैक्स अध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि इस बार सरकार ने किसानों से धान की खरीदारी के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन कराए आनेवाले किसानों से धान नहीं खरीदना है। साथ ही इस बार एक गैर रैयत किसान से अधिकतम 100 क्विंटल तो रैयत किसान से 250 क्विंटल धान की ही खरीदारी करनी है। इन नियमों की जानकारी नहीं होने से भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों के बीच इन सब चीजों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार की जरूरत है।
बोले जिम्मेदार :
भुगतान को लेकर समितियों और बिहार राज्य खाद्य निगम के बीच कुछ अड़चनें आ रही थीं। इस कारण समितियों द्वारा खरीदारी में रुचि नहीं दिखाई जा रही थी। फिलहाल समितियों के लोगों और निगम अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर भुगतान की बाधाओं को दूर कर लिया गया है। इसके अलावा किसानों के बीच प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान को भी गति दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक संख्या में किसानों को इसके प्रति प्रोत्साहित किया जा सके।
प्रशांत कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी

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