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दस वर्षां से मुआवजा के लिए दौड़ रहे किसान

पहाड़पुर मनोरथ व बंगरा निजामत गांव के समीप कटाव से बचाव के लिए बोल्डर स्पर बनाने के लिए अधिगृहित जमीन का दस वर्ष बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।

किसान मुआवजा के लिए भू-अर्जन कार्यालय व जल संसाधन विभाग का चक्कर लगाकर थक गए हैं। दोनों विभागों के उदासीन रवैया से किसानों में नाराजगी है। कृष्णा सिंह, कमलेश कुमार, जितेंद्र सिंह, अवध किशोर बैठा, मदन तिवारी, बृज तिवारी समेत दर्जनों किसानों ने बताया कि गंडक नदी के कटाव से तिरहुत तटबंध को बचाने के लिए बोल्डर स्पर के लिए जल संसाधन विभाग की पहल पर भूअर्जन कार्यालय ने वर्ष 2008 में जमीन अधिगृहित किया। उसके बाद जल संसाधन विभाग ने पहाड़पुर मनोरथ में दो तथा बंगरा निजामत में दो बोल्डर स्पर का निर्माण कराया। मुआवजा राशि भुगतान के सवाल पर दोनों विभाग के अधिकारी किसानों को इधर से उधर दौड़ा रहे हैं। इससे परेशान होकर किसान कमलेश कुमार सिंह ने 2016 को लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के यहां पहली अपील दायर की। इसके बाद 10 दिसंबर 2016 को दूसरी अपील दायर किया तो भूअर्जन कार्यालय ने मुआवजा भुगतान के लिये छह माह का समय मांगा। जब भुगतान नहीं हुआ तो आयुक्त के यहां तीसरी अपील की गई। उसमें विशेष भूअर्जन पदाधिकारी ने कहा कि पुराने दर के अनुसार मुआवजा राशि आयी है। पुनः नई भूअर्जन नियमावली के तहत दस करोड़ 36 लाख 58 हजार रुपये आवंटन करने की मांग की गई। अब किसानों ने मुआवजा भुगतान के लिए आंदोलन की रूप रेखा तैयार करने के लिए शुक्रवार को महा पंचायत बुलाई है।

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  • Web Title:Farmers running for compensation for ten years