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 कनेक्शन तो मिल रहा पर नहीं बना अलग से कृषि फीडर

कनेक्शन तो मिल रहा पर नहीं बना अलग से कृषि फीडर

संक्षेप: मुजफ्फरपुर में किसानों को सिंचाई के लिए अलग कृषि फीडर का लाभ नहीं मिल सका है। किसान डीजल पंप पर निर्भर हैं, जिससे कृषि लागत बढ़ रही है। सरकार ने खेतों में बिजली पहुंचाने की योजना शुरू की थी, लेकिन बिना फीडर के किसानों को कृषि कनेक्शन मिलने में परेशानी हो रही है।

Sun, 2 Nov 2025 06:15 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। सिंचाई के लिए अलग से बिजली उपलब्ध कराने के लिए कृषि फीडर की स्थापना का लाभ जिले के किसानों को नहीं मिल सका। किसान डीजल चालित पंपसेट पर निर्भर थे। यह काफी महंगा होता है। इससे कृषि लागत काफी बढ़ जाती है। सिंचाई के लिए डीजल पंपसेट पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने हर खेत में बिजली पहुंचाने की योजना शुरू की। इसके लिए अलग से कृषि फीडर स्थापित करने की योजना की स्वीकृति दी गई। फिलहाल बिना फीडर के किसानों को कृषि कनेक्शन तो दिया जा रहा, लेकिन यह काफी परेशानी वाला है। इसके लिए कई स्थानों पर अलग से ट्रांसफॉर्मर नहीं लग रहा है।

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मजबूरन किसानों को सामान्य ट्रांसफार्मर से ही निजी स्तर पर तार जोड़ कर खेतों तक ले जाना पड़ता है। कई जगह ट्रांसफॉर्मर लगा पर बिजली नहीं पहुंची। औराई प्रखंड के चहुंटा गांव के आनंद कुमार ने बताया कि उनके गांव में 30 किसानों को कृषि कनेक्शन मिला। एक वर्ष पहले इसके लिए अलग से ट्रांसफार्मर लगा दिया गया, पर अब तक बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया है। इससे यह बेकार पड़ा है। विभाग में कई बार शिकायत की गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। कांटी प्रखंड के बकटपुर के किसान अनिल कुमार ओझा, श्याम नारायण ठाकुर ने बताया कि लगभग तीन-चार महीना पहले कृषि कनेक्शन के लिए बिजली विभाग में आवेदन किया। अब तक कृषि कनेक्शन नहीं मिला। मीनापुर के किसान अनिल कुमार ने बताया कि उन्होंने कृषि कनेक्शन के लिए आवेदन किया। बिजली विभाग ने बिना कारण बताए ही निरस्त कर दिया। पोर्टल बंद होने के कारण जमीन की ऑनलाइन रसीद नहीं कट रही है, इससे नया आवेदन नहीं पा रहे हैं। हर पीएसएस में बनाना था कृषि फीडर : योजना के अनुसार जिले के हर पवर सब स्टेशन में अलग से कृषि फीडर बनाना था। इसका उद्देश्य जिले के सभी खेतों को इसके कवरेज क्षेत्र के तहत लाना था। जिले में करीब 30 पीएसएस हैं। कृषि फीडर से अलग से विद्युत संचरण लाइनों व ट्रांसफार्मर के माध्यम से खेतों तक बिजली पहुंचाना था। सिंचाई के उपयोग में खपत की गई बिजली बिल में 90 प्रतिशत सब्सिडी की भी घोषणा की गई थी। जरूरत के अनुसार नहीं मिलती बिजली: जिले में कृषि कनेक्शन का लाभ देने के लिए किसानों के खेतों का सर्वे कराया गया। इस सर्वे का क्या हुआ कुछ पता नहीं चल रहा है। किसानों की मांग पर गांवों में बिजली की आपूर्ति वाले सामान्य संचरण लाइनों से ही कृषि कनेक्शन दिए जा रहे हैं। जिले में लगभग तीन हजार किसानों को कृषि कनेक्शन तो दिया गया पर अलग कृषि फीडर नहीं होने से कृषि कार्य के अनुरूप बिजली की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाती है।