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23 जनवरी, 2020|11:42|IST

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कृषि यांत्रिकीकरण का किसानों को नहीं मिल सका फायदा

कृषि विभाग की सबसे बड़ी योजना का लाभ इस वित्तीय वर्ष में अबतक किसानों को नहीं मिल सका है। विभाग में 19 योजनाएं संचालित हैं, जिसमें से सबसे अधिक राशि 7.30 करोड़ कृषि यांत्रिकीकरण योजना में आवंटित की गयी है। इसके बाजवूद किसान इस योजना से महरूम है। वित्तीय वर्ष 2019-20 का खरीफ सीजन बीत चुका है और रबी सीजन में बुआई हो चुकी है। विभाग ने बीते माह के अंतिक सप्ताह में इसके लिए किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगा है। किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग के चक्कर काटकर थक चुके हैं। वित्तीय वर्ष के खत्म होने में अब सिर्फ दो महीने बचे हैं। इतने कम समय में विभाग सात करोड़ की अनुदान राशि आम किसान तक कैसे पहुंचेगी यह बड़ा सवाल है। उधर, किसानों का कहना है कि खरीफ व रबी बुआई करने के बाद उनके पास अब इतनी राशि नहीं बची है कि वे कृषि यंत्र खरीद सकें। 
मेला लगाकर किसानों को देनी है कृषि यंत्र की जानकारी : कृषि यांत्रिकीकरण योजना में कृषि यंत्रों की जानकारी मेला लगाकर किसानों को देनी होती है। गाइड लाइन के अनुसार, प्रत्येक प्रखंड में मेले का योजना किया जाना है। इसके बाद मुजफ्फरपुर के दोनों अनुमंडल स्तर पर एक-एक मेले का आयोजन होना है। इसकी प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसानों ने अभी आवेदन करना शुरू ही किया है। किसानों का कहना है कि आखिर कब विभाग मेला लगाएगा और कब किसान को यंत्र खरीदने के लिए परमिट जारी किया जाएगा।

सब्सिडी बचाने का चल रहा खेल

पताही के किसान रामचंद्र सहनी ने कृषि विभाग पर आरोप लगाया कि बड़ी योजनाओं में विभाग जानबूझ कर सब्सिडी बचाने का खेल करता है। योजनाओं को वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में शुरू किया जाता है, जिससे बड़े किसानों को ही इसका फायदा पहुंचाया जा सके। कुढ़नी के किसान राजेश यादव के अनुसार, विभाग को आम किसानों को कृषि यंत्र का फायदा पहुंचाना है तो अक्टूबर में इस योजना को शुरू करना चाहिए। इससे खरीफ व रबी दोनों फसलों में कृषि यंत्रों का उपयोग हो सकेगा। 
योजना राज्य स्तर से स्वीकृत की जाती है। कृषि यांत्रिकीकरण योजना की स्वीकृति नंवबर के अंतिम सप्ताह मिली है। किसानों को इसका लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। जल्द प्रखंड व अनुमंडल स्तर पर कृषि यंत्र मेला का आयोजन किया जाएगा।     
    -डॉ. केके वर्मा, जिला कृषि अधिकारी 

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  • Web Title:Farmers could not benefit from agricultural mechanization