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कुपोषित बच्चों को भी नहीं नसीब हो पा रहा मीठा भोजन

जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक महीने से पोषाहार बंद है। इसके कारण बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने तो पोषाहार रोजाना देने का आदेश तो निकाल दिया। मगर साल में कई महीने पोषाहार नहीं रहने से आंगनबाड़ी केन्द्रों का चूल्हा ठंडा रहता है। ऐसे में पोषण के बिना सबसे अधिक कुपोषित बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। आवंटन नहीं मिलने का रोना रो रहे अधिकारी: हर साल गर्मी में होने वाली एईएस बीमारी से बचाव के लिए बच्चों को मीठा भोजन देने का विभाग ने निर्णय लिया था। एक माह पूर्व केन्द्रों पर बच्चों को मीठा भोजन देने का आदेश जारी किया गया। लेकिन बच्चों को पोषाहार के साथ-साथ मीठा भोजन भी नहीं नसीब हो रहा है। इधर, अधिकारी आवंटन नहीं मिलने का रोना रो रहे हैं। कई सेविकाएं बताती हैं कि पोषाहार बंद होने से केन्द्र पर कम बच्चे ही आ रहे हैं। अपने रुपये से टॉफी बिस्कुट लाकर बच्चों को देती हूं ताकि वे केन्द्र पर रूक सकें। जिले में 3780 आंगनबाड़ी केन्द्र व 138 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र: जिले में करीब 3780 आंगनबाड़ी केन्द्र व 138 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र कार्यरत हैं। एक केन्द्र पर 96 लाभुक होते हैं। इसमें 40 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे होते हैं। जिले में कार्यरत केन्द्रों पर कुल एक लाख 51 हजार 200 कुपोषित बच्चे हैं। विभाग की ओर से एक केन्द्र को 15 हजार 700 रुपये दिए जाते हैं। वहीं मिनी केन्द्र को सात हजार 850 रुपये दिए जाते हैं। यहां 48 लाभुक होते हैं। इनमें 20 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे होते हैं। सभी मिनी केन्द्रों पर कुल दो हजार 760 बच्चे हैं। लेकिन इन बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। डीपीओ मो. कबीर ने बताया कि इस साल केन्द्रों के लिए कितना आवंटन चाहिए, इसकी रिपोर्ट विभाग ने मांगी है। यह रिपोर्ट विभाग को भेजी जा रही है। आवंटन आने के बाद बच्चों को पोषाहार मिलने लगेगा।

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  • Web Title:Even the malnourished children are not able to eat sweet food