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एक करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी पंप हाउसों से नहीं मिलता पानी

एक करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी पंप हाउसों से नहीं मिलता पानी

नगर निगम के सभी 27 पंप हाउसों पर सलाना एक करोड़ रुपये से अधिक बिजली मद में खर्च होता है। एक व्यक्ति को आवश्यकता के अनुसार 40 फीसदी पानी भी नहीं मिल पाता है। एक दिन में एक व्यक्ति को तकरीबन 135 लीटर पानी की आवश्यकता है। लेकिन मुश्किल से एक दिन में 40 से 30 फीसदी पानी नहीं मिल पाता है। निगम के ही रिकॉर्ड के अनुसार महीने में औसत दस पंप हाउस खराब रहते हैं। एक पंप बनने में सात दिन का समय लग जाता है। यह खुलासा तब हुआ जब एस्सेल कंपनी ने निगम से बिजली मद में 20 करोड़ रुपये की मांग की है। इस मांग के आधार पर कंपनी को निगम यह तर्क दे रहा है कि पंप हाउस उसका खास समय पर चलता है। महीने में तो कई बंद भी रहते हैं। कंपनी का कहना है कि पंप हाउस में सबसे अधिक बिजली खपत है। निगग का कहना है कम खपत है। इसी बीच में लगातार छठे दिन कई इलाकों में जलापूर्ति की समस्या कायम है। इमलीचट्टी का पंप हाउस बनने के बाद भी बिजली नहीं रहने से जलापूर्ति की समस्या यथावत रही। पशुपालन, पीएनटी दुर्गा स्थान,वाणिज्यकर इंटर कॉलेज का पंप अभी तक नहीं बन पाया है। अब सभी पंप हाउस दुरुस्त होंगे : नगर आयुक्त नगर आयुक्त संजय दुबे ने बताया कि यह सही है कि ज्यादातर पंप हाउस खराब हो रहे हैं। चार अभी खराब है। एक बन चुका है। बिजली बिल की राशि भी अधिक आती है। इसको देखते हुए पहल हो रही है। पंप हाउस के मशीन का पार्ट्स खराब होने पर ब्रांडेड कंपनियों का पार्टस नहीं लगता था। अब जलकर विभाग को सख्त आदेश दिया गया है कि लोकल कंपनी की मशीन नहीं लगाएं। इसके साथ अन्य जो पंप हाउस है उसको ठीक किया जाएगा।

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  • Web Title:Even after spending one crore, the pump houses did not get water