शीघ्र सुनवाई के लिए ढांचे में सुधार की आवश्यकता
मुजफ्फरपुर में एसकेजे लॉ कॉलेज में आयोजित सेमिनार में न्यायालयों में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता पर चर्चा की गई। प्राचार्य डॉ. केएन तिवारी और मुख्य अतिथि मणिशंकर मणि ने न्याय प्रणाली में सुधार की बात की। सभी वक्ताओं ने तकनीकी एकीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से न्याय में देरी की समस्या को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। भारतीय न्याय प्रणाली में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 जैसे नए कानूनों के माध्यम से जांच और परीक्षण में समय सीमा तय की जानी चाहिए। ये बातें शनिवार को एसकेजे लॉ कॉलेज में आज के समय में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता : चुनौतियां और उपाय पर आयोजित सेमिनार में प्राचार्य डॉ. केएन तिवारी ने कहीं। सिविल कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी मुख्य अतिथि मणिशंकर मणि ने भारतीय न्याय व्यवस्था में शीघ्र सुनवाई को स्पष्ट करते हुए कहा कि बिना किसी आवश्यक देरी के आपराधिक मामलों का निपटारा करना इसका मकसद है। उन्होंने कहा कि अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं, जिससे मुख्य कार्य प्रभावित होता है।
महाविद्यालय के निदेशक जयंत कुमार ने न्यायालय में वादों की शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। प्रो. धनंजय पांडेय ने कहा कि केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे में सुधार और तकनीकी एकीकरण से ही न्याय में देरी की समस्या को दूर किया जा सकता है। अन्य वक्ताओं में महाविद्यालय के प्रशासक डॉ. रत्नेश कुमार, वरीय शिक्षक डॉ. एसपी चौधरी, प्रो. आरए सहाय, प्रो. आशुतोष कुमार, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. विश्वजीत कुमार, डॉ. मधु कुमारी आदि शामिल थे। मंच संचालन प्रो. अरुण कु. पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बीएम आजाद ने किया।
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