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चुनावी मुद्दा : बापू की कर्मभूमि पर न शिक्षा संवरी न बुनियादी सुविधाओं का विकास

चुनावी मुद्दा :  बापू की कर्मभूमि पर न शिक्षा संवरी न बुनियादी सुविधाओं का विकास

1 / 2महात्मा गांधी की कर्मभूमि पश्चिम चंपारण में अब भी जनता का ‘सत्याग्रह अनसुना है। उनकी जीवन दशा नहीं सुधर सकी है। पश्चिम चंपारण लोकसभा क्षेत्र में तीन-तीन विधानसभा क्षेत्र बेतिया व मोतिहारी के आते हैं।...

चुनावी मुद्दा :  बापू की कर्मभूमि पर न शिक्षा संवरी न बुनियादी सुविधाओं का विकास

2 / 2महात्मा गांधी की कर्मभूमि पश्चिम चंपारण में अब भी जनता का ‘सत्याग्रह अनसुना है। उनकी जीवन दशा नहीं सुधर सकी है। पश्चिम चंपारण लोकसभा क्षेत्र में तीन-तीन विधानसभा क्षेत्र बेतिया व मोतिहारी के आते हैं।...

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महात्मा गांधी की कर्मभूमि पश्चिम चंपारण में अब भी जनता का ‘सत्याग्रह अनसुना है। उनकी जीवन दशा नहीं सुधर सकी है। पश्चिम चंपारण लोकसभा क्षेत्र में तीन-तीन विधानसभा क्षेत्र बेतिया व मोतिहारी के आते हैं। इस बार यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बाढ़ जैसे कई मुद्दे चुनावी फिजां में तैर रहे हैं। बेतिया में एक भी सरकारी महिला कॉलेज नहीं है। मैट्रिक के बाद बाहर पढ़ने जाना उनकी मजबूरी है। पश्चिम चंपारण में उच्च शिक्षा की व्यवस्था लगभग चौपट है। महिलाओं के लिए जिले में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं है। छात्रों के लिए भी यहां उच्च शिक्षा में एमजेके व आरएलएसवाई कॉलेज के बाद विकल्प नहीं बचता। जीएमसीएच का भवन निर्माणाधीन है। सुविधाओं के अभाव में अधिकतर अस्पताल मरीज रेफर केन्द्र भर रह गये हैं। अधिकतर पीएचसी खस्ताहाल में हैं। एनएच-एसएच को छोड़ यहां की अधिकतर ग्रामीण सड़कें जर्जर हैं। पश्चिम चंपारण का गौरव, सरया मन भी सूखने की कगार पर है।

बेहतर अस्पताल के अभाव में दम तोड़ते मरीज

जिले का एक मात्र अस्पताल जीएमसीएच मरीजों को रेफर करने वाला संस्थान बनकर रह गया है। हालांकि अस्पताल के भवन का निर्माण हो रहा है। लेकिन तब तक जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मोतिहारी, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर समेत अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अधिकांश समय पटना या गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में ही गंभीर मरीज दम तोड़ देते हैं। सभी छह विधासभा क्षेत्रों के गांव व शहर की अधिकांश सड़कें जर्जर हैं। बेतिया शहर में 60 फीसदी सड़क जर्जर है। यही हाल ग्रामीण सड़कों का है। अब भी कई गांवों कच्ची सड़कों पर चलने के लिए लोग मजबूर हैं।

कौन कब जीता

1952: भोला राउत

1957: भोला राउत

1962: भोला राउत

1967: कमलनाथ तिवारी

1971: कमलनाथ तिवारी

1977: फजलु रहमान

1980: केदार पाण्डेय

1984: पीतांबर सिंह

1985: मनोज पाण्डेय

1989: धर्मेश प्रसाद वर्मा

1991: फैयाजुल आजम

1996: डॉ. मदन जायसवाल

1998,99: डॉ. मदन जायसवाल

2004: रघुनाथ झा

2009: डॉ. संजय जायसवाल

2014: डॉ. संजय जायसवाल फैक्ट फाइल

वर्तमान सांसद: डॉ.संजय जायसवाल

सर्वाधिक मत से जीते: डॉ. संजय जायसवाल (110256) 2014 में

सबसे कम मत से जीते : धर्मेंद्र प्रसाद वर्मा (14000) 1989 में

सबसे कम उम्मीदवार 1961-67 में 03

सबसे ज्यादा उम्मीदवार 1991 में 21

कुल मतदाता: 1606271

पुरुष मतदाता : 865222

महिला मतदाता : 740984

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  • Web Title:Electoral Issue Development of infrastructure not infrastructure for Bapu s Karmabhoomi