
चाय पे चर्चा : माननीय अपना धर्म-ईमान न छोड़ें, जनता भी नहीं छोड़ेगी उनको
चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, जिससे प्रत्याशियों पर चर्चा और भी बढ़ गई है। मतदाता स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रहे हैं और विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर वोट देने का मन बना रहे हैं।...
फोटो : पंकज जी मुजफ्फरपुर : चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं गंभीर और दिलचस्प होती जा रही हैं। चाय की दुकानों पर तर्क-वितर्क, वाद-विवाद शबाब पर हैं। वे चाय की चुस्की के साथ निवर्तमान विधायकों के साथ भावी प्रत्याशियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। स्थानीय मुद्दों को उतनी ही शिद्दत से उछाल रहे हैं। पारदर्शिता की बात कर रहे हैं। हालांकि, अभी आधी सीटों पर भी प्रत्याशी फाइनल नहीं हो सके हैं। बावजूद चुनाव का गुणा-गणित व दल विशेष की जीत-हार को लेकर मंथन जबरदस्त है। बहस-मुबाहिसे में एक बात कॉमन है और वो है माननीय अपना धर्म-ईमान न छोड़ेंगे तो जनता भी उनको पलकों पर बिछाकर रखेगी।

वैसे तो मतदाता काफी सजग हैं, लेकिन कभी-कभी सियासी उबाल ऐसा बवंडर रूप धारण कर लेता है कि सिरफुटौव्वल की नौबत आ जाती है। दरभंगा रोड में सदातपुर-कोल्हुआ के बीच हाईवे पर चुनावी चर्चा छिड़ी थी। यहां स्पीकर चौक के मो. राशिद व सदातपुर चौबे टोला के राकेश चौबे ने कहा कि जो उम्मीदवार आएंगे उनसे यही उम्मीद रहेगी कि वह हमारे बीच रहे, काम करें और हमारी बातों को गंभीरतापूर्वक सुनकर उसपर अमल करें। हम लोग युवा हैं। कोल्हुआ के मणिभूषण कुमार तिवारी का कहना है कि बेरोजगारी इतनी है कि काम तलाशना पड़ता है। बहुत तलाशने के बाद भी काम नहीं मिलता है। इसलिए इस चुनाव में विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर वोट करेंगे। ऐसे में जो उम्मीदवार आएंगे उनसे इन्हीं मुद्दों पर बात करेंगे। सदातपुर के सौरव कुमार व अभय कुमार पाण्डेय का कहना है कि चुनाव के समय सभी प्रत्याशी हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। विधायक बनते ही अपने तेवर में आ जाते हैं। अगर मंत्री बन गए तब तो तेवर देखने लायक होता है। गाड़ी से सीधे निकल जाते हैं। क्षेत्र में पलटकर ताकते नहीं। वो भूल जाते हैं कि जनता ने ही उन्हें वोट देकर अपना सिरमौर बनाया है। मीनापुर के लक्ष्मण कुमार, सदातपुर बैरिया के मो. लालबाबू का कहना है कि जितनी सादगी विधायकी के पहले नेता दिखाते हैं अगर उसी रंग-ढाल में पूरे कार्यकाल रहते तो जनता उन्हें अपने पलकों पर बिछाकर रखती है। शायद यहीं कारण है कि जनता का आक्रोश भड़क रहा है और कई जगहों पर वैसे नेताओं को उसका शिकार होना पड़ रहा है।

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