
एसकेएमसीएच: दो दिन में आईसीयू में आठ मरीजों की मौत
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में दो दिनों में आठ मरीजों की मौत हो गई। मरीजों की निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन आईसीयू में नर्स और जूनियर डॉक्टरों की कमी है। इसके कारण मरीजों की जांच में भी देरी हो रही है। डॉक्टरों ने और स्टाफ की आवश्यकता बताई है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल की आईसीयू में दो दिनों में आठ मरीजों की मौत हुई है। ये सभी मरीज सांस, स्ट्रोक और हृदय रोग से पीड़ित बताए गए हैं। इधर, दो दिन में आठ रोगियों की मौत के बाद आईसीयू में मरीजों की निगरानी बढ़ा दी गई है। एसकेएमसीएच की मेडिसिन आईसीयू और एचडीयू मिलाकर 26 बेड हैं। सभी बेड पर भर्ती मरीजों के लिए नर्स और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर नहीं हैं। आईसीयू में एक शिफ्ट में तीन नर्स ही काम कर रही हैं। यही हाल एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) का है। एचडीयू में कई मरीजों के बेड पर मॉनिटर भी नहीं लगे हैं।
मॉनिटर नहीं रहने से मरीजों की स्थिति का पता नहीं चल पाता है। कई जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के रिजाइन करने से मरीजों की देखरेख करने के लिए डॉक्टर की कमी है। एक ही डॉक्टर की ड्यूटी 24 घंटे की शिफ्ट लग रही है। सूत्रों ने बताया कि आईसीयू में मरीजों की ईसीजी जांच कराने में भी परेशानी हो रही है। ईसीजी कराने के लिए इमरजेंसी से तकनीशियन को बुलाना पड़ता है, जिससे जांच में देरी होती है। इसके अलावा अगर मरीज की न्यूरो या हृदय की जांच करानी होती है तो नंबर लगाने में भी पूरा दिन निकल जाता है। कई बार जांच में देरी होने पर भी मरीजों की हालत खराब हो जाती है। आईसीयू में नंबर लगाने का काम चतुर्थ वर्गीय कर्मी का होता है। आईसीयू में चतुर्थ वर्गीय कर्मी की कमी से यह परेशानी हो रही है। डॉक्टरों के मुताबिक आईसीयू में 10 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर और 10 नर्स की जरूरत है। बयान आईसीयू में मौत के आंकड़ों की जानकारी नहीं मिली है। आईसीयू में गंभीर मरीज आते हैं। कुछ जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। आईसीयू में मरीजों की निगरानी के लिए नर्स और डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। - डॉ सतीश कुमार सिंह, उपाधीक्षक, एसकेएमसीएच

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