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नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा मामले में मुजफ्फरपुर में ईडी का छापा

नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा मामले में मुजफ्फरपुर में ईडी का छापा

संक्षेप:

मुजफ्फरपुर में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े की सूचना पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की। ईडी की टीम ने कामेश्वर पांडेय के घर की तलाशी ली, जो मुख्य आरोपित राजेंद्र तिवारी का रिश्तेदार है। कामेश्वर 19 दिसंबर से किराए पर रह रहा था, जबकि मकान मालिक धार्मिक यात्रा पर थे।

Jan 09, 2026 01:58 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर। रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मुजफ्फरपुर के रामबाग चौड़ी में छापेमारी की। रामबाग चौड़ी स्थित शास्त्री नगर मोहल्ले के जयप्रकाश पथ में नंदकिशोर गुप्ता के मकान में किराए पर रह रहे कामेश्वर पांडेय के घर सुबह सात बजे ईडी की टीम पहुंची। यहां कामेश्वर पांडेय के घर की तलाशी ली और परिजनों से पूछताछ की। कार्रवाई के दौरान कामेश्वर घर पर मौजूद नहीं था। दोपहर करीब एक बजे तक चली तलाशी के बाद टीम लौट गई। ईडी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई रेलवे में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा से जुड़ी है।

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मुख्य आरोपित राजेंद्र तिवारी के रिश्तेदार कामेश्वर के घर की तलाशी ली गई। हालांकि, बरामदगी के संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। मकान मालिक नंदकिशोर गुप्ता धार्मिक यात्रा पर वाराणसी गए थे। कार्रवाई की जानकारी के बाद वाराणसी से लौटे गुप्ता ने बताया कि कामेश्वर बीते 19 दिसंबर से यहां किराए पर रह रहा था और उसने खुद को छपरा निवासी बताया था। इससे पहले कामेश्वर चूनाभट्ठी मोहल्ले में रहता था। बीते 30 साल से कामेश्वर का परिवार मुजफ्फरपुर शहर में रहता है। उसका आधार कार्ड मुजफ्फरपुर के चंदवारा मोहल्ले के पते पर बना हुआ है। इसी आधार कार्ड को उसने मकान मालिक को पहचान के रूप में दिया था। वहीं, कामेश्वर के परिवार के सदस्यों ने भी इस संबंध में कुछ बताने से परहेज किया। ईडी की कार्रवाई के बाद नंदकिशोर ने कामेश्वर को मकान खाली करने की हिदायत दे दी है। कामेश्वर के परिवार में पत्नी, पुत्र, बहू और तीन पोता-पोती रहते हैं। यह परिवार स्थानीय स्तर पर व्यवसाय करते हैं। ईडी की कार्रवाई के बाद कामेश्वर के परिवार ने मकान मालिक व मोहल्ले के लोगों को बताया कि उसके साढ़ू की बेटी ने लोन लिया था। मामले में बैंककर्मी पटना से पूछताछ के लिए आए थे। हालांकि, उसकी कहानी पर मोहल्ले के लोग विश्वास नहीं कर रहे हैं।