
शिक्षा को नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ना जरूरी : डॉ. हाशमी
प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. अंजर हाशमी ने शिक्षकों से छात्रों में शोध, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक समझ विकसित करने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस्लामी और शैक्षणिक संबंधों को समझना जरूरी है। डॉ. हाशमी को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है और उनकी नई शोध पुस्तक भी प्रस्तुत की गई।
औराई, एसं। प्रसिद्ध शिक्षाविद, अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता व राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. अंजर अकील उर्फ अंजर हाशमी ने मंगलवार को स्थानीय लोहिया चौक स्थित एक निजी शिक्षण केंद्र में उपस्थित शिक्षाविदों से संवाद कर कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में शिक्षा को वैश्विक सोच, राष्ट्रीय निष्ठा और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे छात्रों में शोध की आदत, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक समझ विकसित करें, ताकि आनेवाली पीढ़ी एक योग्य और चरित्रवान नेतृत्व दे सके। उन्होंने यह भी बताया कि इंडोनेशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच इस्लामी और शैक्षणिक संबंध एक साझा ज्ञान परंपरा पर आधारित हैं, जिसपर शोध और संवाद समय की मांग है।
डॉ. हाशमी ने अपने हाल के विदेशी दौर के अनुभव भी साझा किये। कार्यक्रम के अंत में डॉ. हाशमी ने अपनी शोध पुस्तक “बाबा मजनूं शाह मलंग मदारी: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक गुमनाम नायक” भेंट की। उल्लेखनीय है कि डॉ. हाशमी को उनकी शैक्षणिक सेवाओं के लिए 11 फरवरी 2024 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर उन्हें लाल किला, दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। मौके पर डॉ. आल रसूल उर्फ डॉ. चांद, कारी मजहर अकील, तौफीक रजा, मो. मुबीन, शाहिद करीमी, उबैद शेख सहित अन्य उपस्थित थे।

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