Muzaffarpur News: साहित्य से जिले के युवाओं को जोड़ेंगी डॉ. अनामिका
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में साहित्य अकादमी से सम्मानित डॉ. अनामिका ने कहा कि आज के युवा बेरोजगारी जैसे कारणों से साहित्य से नहीं जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने शहर में साहित्य का माहौल बनाने और युवाओं के लिए एक संस्था स्थापित करने की योजना बताई। डिजिटल युग में साहित्य का प्रवेश युवाओं को एक नया मंच दे सकता है।

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। साहित्य के लिए सबके मन में उतनी ही जगह होती है जितनी अपनी मां के लिए। परिस्थितियां जीवन में बदल जाती हैं। कई बार परिस्थिति ऐसी होती है कि चाहते हुए भी जिस तरह मां-बाप की छांव में बच्चे नहीं बैठ पाते, उसी तरह साहित्य की चाह रखते हुए भी आज के युवा बेरोजगारी समेत अन्य कारणों से इससे नहीं जुड़ पाते हैं। मगर प्यास रहती है कि साहित्य से जुड़ा जाए। शनिवार को शहर पहुंची साहित्य अकादमी से सम्मानित डॉ. अनामिका ने文学 में बदलाव, शहर में साहित्य का माहौल, युवाओं को इससे जोड़ने ये लेकर कई मुद्दों पर हिन्दुस्तान से बात की।
आज का युवा
उन्होंने कहा कि आज के युवा कई तरह की अनिश्चितता और सकंट से गुजर रहे हैं। स्थाई रोजगार ही नहीं, संबंध भी उनके पास स्थाई नहीं है। ऐसे में साहित्य से जुड़ना युवाओं को सुकून दे सकता है मगर दिक्क्त यह है कि यहां भी माहौल नहीं है। मुजफ्फरपुर अपनी साहित्य-संस्कृति के लिए प्रख्यात रहा है, वहां आज ना उस तरह का माहौल है और ना ही कोई संगठन जहां वे बैठ सकें। ना कोई संस्था है, जो इस तरह का आयोजन करे, जहां साहित्य लेखन में युवा आगे बढ़ें।
डिजिटल युग में साहित्य का प्रवेश
डॉ. अनामिका ने कहा कि मुजफ्फरपुर में साहित्य की प्रतिभा से लबरेज युवाओं की कमी नहीं है। कई युवा आए जो अपनी कविता की रिकार्डिंग करना चाहते हैं। कई युवा लेखक, कवि रिकार्डिंग करके लाए थे ताकि उसे सुना सके। वे वाहते थे कि इसे सुनकर संपादित किया जा सके। ऐसे में हम कह सकते हैं कि एक बड़ा परिवर्तन साहित्य में हुआ है, जहां डिजिटल युग में साहित्य ने प्रवेश किया है, जो युवाओं को एक मंच भी दे रहा है।
संस्थान की स्थापना
मुजफ्फरपुर के युवाओं के लिए डॉ. अनामिका एक ऐसी संस्था बनाएंगी, जो साहित्य के क्षेत्र में उन्हें आगे ला सके। इस शहर में साहित्य का प्रवाह और ऊर्जा कैसे दीप्तमयान हो, इसके लिए वे चिन्तित हैं। उन्होंने कहा कि यहां के युवाओं के लिए मैं हिन्दी साहित्य से लेकर विश्व साहित्य की जितनी जानकारी मेरे पास है, उसे डिजिटलाइज्ड करूंगी, ताकि युवा हर समय मुझ तक भले ना पहुंच सकें, साहित्य को मैं इन तक पहुंचा सकूंगी।


