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जिले में डेढ़ लाख बच्चों पर डायरिया व निमोनिया का खतरा

जिले में डेढ़ लाख बच्चों पर डायरिया व निमोनिया का खतरा

जिले में करीब डेढ़ लाख बच्चों पर डायरिया व निमोनिया बीमारी का खतरा है। ये सभी चिह्नित बच्चे पांच साल उम्र के नीचे के हैं। इनको इन बीमारियों से बचाने के लिए तुरंत इलाज की जरूरत है। मौसम में लगातार उतार चढ़ाव के कारण सक्रिय हुए सिगेला बैक्टीरिया व रोटा वायरस से बच्चों में दस्त, डायरिया के साथ दमफुली व बुखार की समस्या हो सकती है। इलाज की व्यवस्था जल्द नहीं हुई तो इन बच्चों की जिन्दगी खतरे में पड़ सकती है। यह बातें स्वास्थ्य विभाग व यूनिसेफ की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है।

करीब सवा पांच लाख ग्रामीण घरों के सर्वे के बाद इन बच्चों को चिह्नित किया गया है। सर्वे में करीब डेढ़ लाख के अलावा 95 हजार 507 ऐसे बच्चे मिले हैं जो काफी कमजोर हैं। इनको कभी भी डायरिया के साथ निमोनिया व अन्य बीमारियां हो सकती हैं। वहीं, जिले में किसी अस्पताल में जिंक दवा नहीं होने से बच्चे के लिए डायरिया खतरनाक साबित हो सकता है। ओआरएस की खरीदारी कर ली गई है, लेकिन जिंक दवा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार 39 हजार 250 बच्चों के अभिभावक निजी अस्पताल में इलाज कराने में सक्षम हैं। शेष बच्चे सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर हैं।

दरअसल, केन्द्र सरकार के निर्देश पर डायरिया पखवाड़ा अभियान के तहत सर्वे हुआ था। इसके तहत कमजोर बच्चों और वैसे समुदाय वाले टोले को चिह्नित किया गया जहां जनसंख्या घनत्व अधिक व कुपोषित बच्चों की संख्या काफी पाई गई। यहां के बच्चों को तुरंत इलाज की आवश्यकता है।

जिंक की खरीदारी का दिया गया आदेश ::

सीएस डॉ. ललिता सिंह ने बताया कि जिंक दवा की कमी है। इसके अलावा डायरिया की जो दवाएं हैं, वे सभी मौजूद हैं। जिंक टैबलेट की खरीदारी का आदेश दिया गया है। एक आपूर्तिकर्ता तैयार हुआ है। एक सप्ताह में दवा आ जाएगी। उन्होंने बताया कि पीएचसी व एपीएचसी स्तर पर बीमार बच्चों की इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है।

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  • Web Title:Diarrhea and pneumonia threat to 1.5 lakh children in the district