
कोहरे में खुले पड़े नालों से बढ़ा खतरा
मुजफ्फरपुर में कई स्थानों पर खुले नाले घने कोहरे के बीच दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। रामबाग नहर रोड और सादपुरा मेन रोड पर खुले नाले के कारण कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। स्थानीय निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों से नाले को ढकने और सड़क की स्थिति सुधारने की मांग की है।
मुजफ्फरपुर। शहर के कई इलाकों में खुले पड़े नाले कोहरे में जानलेवा साबित हो सकते हैं। अक्सर हो रहे हादसों के कारण लोगों की चिंता बढ़ गई है। रामबाग नहर रोड में तो नाले के दोनों तरफ जर्जर अतिव्यस्त सड़क को देखकर ही रोएं सिहर जाते हैं। सादपुरा मेन रोड के किनारे चौड़े व गहरे खुले नाले हादसों का सबब बन रहे हैं। शहर का सबसे बड़ा फरदो नाला भी खुला है। नकुलवा चौक से गुदरी रोड तक खुले नालों से हो रही दुर्घटनाओं के कारण यह डेंजर जोन बन चुका है। ब्रजबिहारी गली में खुले नाले के आसपास घर से लेकर स्कूल व दुकान तक हैं।
यह अतिव्यस्त सड़क है। घने कोहरे के बीच रात के अंधेरे में नाले का पता नहीं चलने से वाहन नाले में चले जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले नालों के कारण लगातार घटनाएं हो रही हैं, पर जिम्मेदार नहीं जाग रहे हैं। शहर के खादी भंडार से बीएमपी 6 तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा खुला नाला है। आरंभ में खादी भंडार के पास चार फीट चौड़ाई है। हालांकि रामबाग चौरी से बीएमपी तक करीब एक किलोमीटर के दायरे में नाले की चौड़ाई 10 से 12 फीट तक है। नाले के आसपास सघन रिहायशी इलाका है। रामबाग चौरी, आदर्श नगर, आजाद नगर, शास्त्रीनगर, मदीना मस्जिद कॉलोनी व अन्य मोहल्ले हैं, जिनमें आबादी 15 हजार से अधिक है। स्थानीय विलास साह, मेघन सहनी, मो. अशफाक, मुश्ताक, बालेश्वर महतो के मुताबिक नाला व सड़क की चौड़ाई 40 फीट है, लेकिन अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर चौड़ाई कम हो गई है। नाले के दोनों तरफ करीब 12 से 15 फीट चौड़ी सड़क है। हालांकि इसका बुरा हाल है। कहीं पुरानी ईंट की सोलिंग तो कहीं सड़क कच्ची है। बगल में नाला बह रहा है। कई प्वाइंट पर कीचड़ व फिसलन है। कब वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए, कहना मुश्किल है। बीते 26 दिसंबर की शाम बैक करने के क्रम में ट्रैक्टर नाले में गिर गया। संयोग अच्छा था कि चालक की जान बच गई। विनोद श्रीवास्तव व अशोक तिवारी ने बताया कि अक्सर हादसे हो रहे हैं। सबसे अधिक बाइक व स्कूटी सवार गिरते हैं। हर माह औसतन चार-पांच हादसे हो रहे हैं। कोई चोटिल होता है तो किसी के हाथ-पैर टूटते हैं। ऐसा लंबे समय से हो रहा है। खासकर रात में बिजली गुल होने पर अंधेरे व घने कोहरे के बीच सड़क व नाले का पता नहीं चलने से अक्सर बाइक या स्कूटी सवार नाले में गिर रहे हैं। स्थानीय वार्ड संख्या 46 के पार्षद सैफ अली ने नगर निगम के बोर्ड की बैठक में रामबाग के खुले नाले के ऊपर सड़क निर्माण कराने की मांग की थी। इससे नाला ढंकने के साथ ही सड़क की चौड़ाई बढ़ने से आवागमन भी सुविधाजनक हो जाएगा। शहर का सबसे बड़ा फरदो नाला भी खुला है। यह आउटर नाला है। इसके जरिए बड़े इलाके का पानी शहर से बाहर निकलता है। लंबाई 6.267 किलोमीटर है। यह नाला कल्याणी चौक से शुरू होकर खबड़ा होते हुए फरदो तक जाता है। इसका पानी कदाने नदी में बहता है। इसके अलावा नाले का दूसरा हिस्सा कल्याणी चौक से गांधी पुस्तकालय के नजदीक मन में जाता है। खुला नाला होने के कारण बराबर हादसे होते हैं। फरदो नाले के ऊपर सड़क बनाने का प्रस्ताव पास है। हालांकि प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतरा है। वार्ड संख्या 33 व 34 की सीमा पर स्थित सादपुरा मेन रोड यानी नीम चौक से सादपुरा गुमटी को जोड़ने वाली सड़क के दोनों तरफ नाला है। हालांकि आधे से अधिक हिस्सा खुला हुआ है। विशेषकर नीम चौक से सादपुरा गुमटी के बीच बुरा हाल है। नीम चौक से गुमटी की ओर बढ़ने पर चौड़े खुले नालों का खतरा है। दूसरी ओर, गुमटी से नीम चौक के बीच कई प्वाइंट पर अपेक्षाकृत कम चौड़े मगर गहरे नाले खुले हुए हैं। गुमटी के दूसरी तरफ खुले नाले में सबसे अधिक हादसे होते हैं। यह एरिया वार्ड संख्या 49 के अंतर्गत आता है। स्थानीय फिरोज आलम, राजू और गोल्डन ने बताया कि खासकर गुमटी खुलने के समय तेजी से निकलने के चक्कर में अक्सर बाइक या स्कूटी सवार फिसल कर नाले में गिरते हैं। नीम चौक से पड़ाव पोखर के बीच भी कई जगहों पर नाला खुला है। इसके कारण पैदल राहगीर भी गिरकर चोटिल होते रहते हैं। नकुलवा चौक से शुरू होकर गुदरी रोड तक खुले नाले के कारण इलाके को डेंजर जोन कहा जाता है। करीब आधे किलोमीटर लंबे इस नाले की चौड़ाई पांच से आठ फीट तक है। सड़क के समानांतर नाला बहता है। कोहरे में कई बार स्थानीय निवासी भी चकमा खाकर वाहन समेत नाले में गिर जाते हैं। कुछ समय पहले एक कार नाले में चली गई थी। स्थानीय लोगों की तत्परता से उसमें सवार लोग सुरक्षित बाहर निकल गए। बोले जिम्मेदार : समस्या के समाधान के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। चरणबद्ध तरीके से खुले नाले पर स्लैब लगाने का काम चल रहा है। आवश्यकता के अनुसार पुराने नाले का पुनर्विकास भी किया जा रहा है। कच्चे गली-नाले को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। नगर सरकार की प्राथमिकता सूची में वार्ड स्तर पर सड़क व नाले का विकास शामिल है। हाल ही में बड़ी संख्या में सड़क व नाले के निर्माण को लेकर टेंडर निकला है और काम हो रहे हैं। निर्मला साहू, मेयर, मुजफ्फरपुर नगर निगम

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