फर्जी सरकारी आईडी बनाने वाले गिरोह के शातिरों की गिरफ्तारी को छापा

Newswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में फर्जी सरकारी आईडी बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने छापेमारी कर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये लोग अवैध वेबसाइटों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे। पुलिस ने भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और जाली दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

फर्जी सरकारी आईडी बनाने वाले गिरोह के शातिरों की गिरफ्तारी को छापा

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। फर्जी सरकारी आईडी बनाने वाले गिरोह के श्रवण शर्मा समेत अन्य शातिरों की तलाश तेज कर दी गई है। इसको लेकर साइबर थाने की पुलिस मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी समेत अन्य जिलों में लगातार छापेमारी कर रही है। श्रवण शर्मा सीतामढ़ी जिला का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों साइबर थाने की पुलिस ने छापेमारी कर औराई थाना क्षेत्र के धारहरवा उर्फ परी गांव से शिवम कुमार, राजू कुमार और सीतामढ़ी जिला के भिट्ठा श्रीखंडी गांव से गिरफ्तारी के बाद अनुराग कुमार झा को गिरफ्तार किया था। तीनों ने पुलिस को श्रवण शर्मा समेत गिरोह के अन्य शातिरों का नाम बताया था। इसके बाद पुलिस ने सरैया सरैया थाना क्षेत्र के गोपालपुर नेऊरा गांव में छापेमारी कर बिपिन कुमार को गिरफ्तार किया था। उसने भी पुलिस की पूछताछ में गिरोह के बारे में कई अहम जानकारी दी है, फिलहाल पुलिस की एक विशेष टीम चारों के निशानदेही पर आगे की कार्रवाई में जुटी है। पुलिस की माने तो इस दोनों कार्रवाई के दौरान आरोपितों के पास और निशानदेही पर पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए थे। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीपीयू, मॉनिटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और फिंगरप्रिंट स्कैनर, बैंक दस्तावेज, मुहर और विभिन्न प्रमाण पत्रों की रसीदें शामिल है。

पुलिस की कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, साइबर थाना मुजफ्फरपुर को पटना की साइबर सुरक्षा इकाई से बीते दिनों इनपुट मिला था कि जिले में कुछ शातिर वेबसाइटों के माध्यम से सरकारी डेटा में सेंधमारी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर विशेष टीम ने औराई, सीतामढ़ी और सरैया इलाके में छापेमारी की। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने बताया है कि वह पिछले एक साल से इन अवैध पोर्टल का उपयोग कर रहा था। चारों ने बताया कि वह मात्र 100 से 200 रुपये लेकर किसी भी व्यक्ति का फर्जी दस्तावेज तैयार कर देता था, इन फर्जी कागजातों का इस्तेमाल बैंक खाते खुलवाने और सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ लेने के लिए किया जाता था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि ये आरोपित अलग-अलग जगहों पर डिजिटल सेवा केंद्र नाम से एक दुकान खोल रखी थी, जिसकी आड़ में वह इस काले कारोबार को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने जब दुकान की तलाशी ली तो वहां से भारी मात्रा में कई कंपनियों के लैपटॉप, एंड्रॉयड मोबाइल फोन, ​फिंगरप्रिंट स्कैनर, ​भारी संख्या में जाली आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ​अवैध वेबसाइटों की लॉगिन हिस्ट्री और दस्तावेजों के प्रिंटआउट समेत अन्य सामान जब्त हुआ। पुलिस की माने तो यह गिरोह मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी समेत आसपास के कई जिलों में एक्टिव थे।

गिरोह की पहचान

जानकारी हो कि साइबर थाने की पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अवैध वेबसाइटों का उपयोग कर लोगों के फर्जी आधार, पैन कार्ड, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र तैयार कर रहा था। इधर, साइबर थानेदार हिमांशु कुमार ने बताया कि मामले में पुलिस के बयान पर अलग अलग दो साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है। वही फिलहाल पकड़े गए आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरोह के अन्य शातिरों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

पूछे जाने वाले प्रश्न

फर्जी आईडी बनाने वाले गिरोह में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

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