भ्र्ष्टाचार के 466 मामले मुजफ्फरपुर कोर्ट में लंबित, नहीं आ रहे गवाह
मुजफ्फरपुर में 466 भ्रष्टाचार के मामले विशेष निगरानी न्यायालय में लंबित हैं। 2025 में आठ मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें से सात आरोपितों की मृत्यु और एक भगोड़ा घोषित होने के कारण केस बंद हुए। गवाहों के न आने के कारण कोई सजा नहीं हुई। अपर मुख्य सचिव ने समय पर गवाहों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। भ्रष्टाचार के 466 मामले मुजफ्फरपुर विशेष निगरानी न्यायालय में लंबित चल रहे हैं। 2025 में आठ मामलों का निष्पादन हुआ। इसमें तीन माह के दौरान सात आरोपितों की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ केस को बंद किया गया है, जबकि एक मामले में आरोपित को भगोड़ा घोषित करते हुए केस की सुनवाई बंद की गई है। गवाहों के नहीं आने के कारण 2025 में एक भी मामले में सजा नहीं हुई। न्यायालय में दम तोड़ रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को हर माह मुजफ्फरपुर के तीनों विशेष लोक अभियोजकों के साथ बैठक कर मामलों में हो रही कार्रवाई की समीक्षा करने का निर्देश दिया है, ताकि समय से न्यायालय में गवाहों की पेशी हो सके।
इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव ने मुजफ्फरपुर के सभी विशेष लोक अभियोजकों से ऐसे मामलों की सूची बनाने के लिए कहा जो 10 साल या उससे अधिक समय से न्यायालय में लंबित हैं। ऐसे मामलों के सभी गवाहों की सूची भी निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव ने मांगी है। विशेष लोक अभियोजकों से कहा गया है कि हर माह में कब-कब गवाहों को पेश करना है, इसकी सूची माह के शुरुआत में ही निगरानी ब्यूरो को उपलब्ध कराएं। ताकि संबंधित गवाहों की न्यायालय में पेशी के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सके। समीक्षा में बताया गया है कि विशेष लोक अभियोजक कृष्णदेव साह के अधीन 196 मामले, विकास नारायण सिन्हा के अधीन 147 और मनोज कुमार के अधीन 123 मामले लंबित हैं। वहीं, जिले में भ्रष्टाचारियों की संपत्ति राज्यसात के 25 मामले लंबित हैं, जिसमें संपत्ति अधिहरण को लेकर कार्रवाई होनी है।

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