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‘आओ राजनीति करें, अब नारी की बारी : शिक्षा-रोजगार तो दूर, पेयजल भी मयस्सर नहीं

‘आओ राजनीति करें, अब नारी की बारी : शिक्षा-रोजगार तो दूर, पेयजल भी मयस्सर नहीं

नीतियों का निर्धारण होने के बाद भी देश का एक बड़ा तबका मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सारी सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पातीं। अच्छी पढ़ाई और रोजगार पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पलायन कर जाते हैं। जो गांव में रह जाते वे स्थानीय चक्रचाल के फेरा में उचित लाभ से महरूम रह जा रहे हैं।शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, सड़क, बिजली आदि की सुविधा हर किसी को नहीं मिल पा रही है। महिलाओं की समस्याओं का निदान नहीं निकल पा रहा है।

ये बातें रविवार को आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान के अभियान ‘आओ राजनीति करें, अब नारी की बारी के तहत सकरा प्रखंड के चंदनपट्टी में आयोजित ‘संवाद में सामने आयी। चंदनपट्टी पंचायत भवन परिसर में हुए इस आयोजन में आधी आबादी ने भी खुलकर अपनी बातें रखीं। मूलभूत सुविधाओं से वंचित महिलाओं में वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ काफी नाराजगी दिखी। कम शिक्षित होने का दर्द भी महिलाओं में दिखा। बावजूद महिलाएं अपने अधिकार को लेकर सजग दिखीं। घर की चहारदीवारी में रहने वाली ग्रामीण महिलाओं ने खुलकर अपनी बातें साझा की। कहा कि पार्टियों के एजेंडे में महिला व उनकेमुद्दे काफी पीछे होते हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि पानी की समस्या से लोग आज भी जूझ रहे हैं। जब चापाकल से पानी आना बंद होने लगा तो सक्षम लोगों ने सबमर्सिबल पंप गड़वा लिया। लेकिन इससे भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं उपलब्ध हो पा रहा। वहीं, अन्य लोग दूर से पानी लाकर अपना काम चला रहे हैं। गैस, बिजली, सड़क आदि की सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।

केशोपुर के राजेन्द्र प्रसाद, देव नारायण दास, अशोक राय, छपरा फरीद के दिनेश झा, चंदनपट्टी के ऋषि कुमार झा, दिनेश रजक, मझौलिया के सत्यनारायण महतो, देवनाथ प्रसाद जोशी, सरोज कुमार झा, शोभित राम आदि ने भी संवाद के दौरान अपनी-अपनी बातें रखी। ने स्कूल के बच्चों की कॉपी नहीं जाचेंगे शिक्षक

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  • Web Title:Come on politics now women s turn education-jobs away drinking water is not available