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21 अक्तूबर, 2020|7:22|IST

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उम्र के आखिरी पायदान पर खड़े बुजुर्गों से दूर हो रहे बच्चे

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उम्र के आखिरी पायदान पर खड़े बुजुर्गों को बच्चों का साथ चाहिए। जो अपनेपन व स्नेह के बंधन से बांध सुकून देता है, लेकिन अब बच्चे बुजुर्गों से दूर होते जा रहे हैं। कोरोना काल में तो इन दोनों के बीच दूरी काफी अधिक बढ़ी है। ये बातें गुरुवार को गोधूलि वृद्धाश्रम के सचिव शैलेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहीं। वह कन्हौली के खादीभंडार स्थित गोधूलि वृद्धाश्रम में बुजुर्ग व युवा पीढ़ी के बीच समन्वय विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माता-पिता ही अपने बच्चे व युवाओं को बुजुर्गों के पास जाने से रोकने लगे हैं। बुजुर्गों को अपने ही घर में उपेक्षित होना पड़ता है। उन्हें अलग कमरा व खाना तो दे दिया जाता है, मगर बच्चों का साथ छूट जाता है। अकेलापन महसूस होने लगता है, जबकि इस उम्र में उनकी सबसे अधिक जरूरत होती है। युवा पीढ़ी को बुजुर्गों का साथ व सम्मान देना चाहिए। इस दौरान आश्रम के बुजुर्गों ने भी अपने परिवार के साथ बिताए पलों को साझा किया। कहा कि बच्चों के रूप में जिस पेड़ से छांव की आस कर लगा रखी थी, आज उससे ही हम दूर हो गए। घर की याद आज भी बहुत सताती है, मगर हमारी फिक्र अब किसी को नहीं रही। मौके पर जानकी दास, लाला प्रसाद, मिथलेश वर्मा, शशिभूषण प्रसाद सिन्हा, आनंद भूषण मिश्रा, आलोक व अमित भी थे।

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  • Web Title:Children falling away from the elders standing at the last rank of age