शिवदास पांडेय ने साहित्य की कई विधाओं में किया लेखन
मुजफ्फरपुर में डॉ. शिवदास पांडेय की जयंती 'प्रणय प्रणयन पर्व' के रूप में मनाई गई। कई कलाकारों ने उनके गीतों की प्रस्तुति दी। अध्यक्षीय उद्गार में चितरंजन सिन्हा ने डॉ. पांडेय को सरल और सृजनात्मक रचनाकार बताया। नगर विधायक रंजन कुमार ने उन्हें अपने अभिभावक के रूप में याद किया।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। साहित्यश्री डॉ. शिवदास पांडेय विचार मंच तथा कला साहित्य मंच के तत्वावधान में हिंदी गीत कविता के समर्थ और प्रेरक रचनाकार डॉ. शिवदास पांडेय की जयंती प्रणय प्रणयन पर्व के रूप में रविवार को मिठनपुरा में मनाया गया। डॉ. शिवदास पांडेय के कई गीतों की सुरमई और लयात्मक प्रस्तुति में सिद्धि शंकर मिश्र ने स्वागत गीत के साथ ही मंगलयान चले, गान झरने लगे, डॉ. राकेश कुमार मिश्र ने तुम मेरे किसी दंस के जहर मीठे, तुम मेरे प्राण में पसर जाओ तथा डॉ. पुष्पा प्रसाद ने मुझे दुनिया की सारी खुशी चाहिए तथाअन्य प्रेमगीत सुनाकर वातावरण को जीवंत कर दिया।
तबले पर हिमांचल संगत कर रहे थे। स्वागत संबोधन में वंदना विजय लक्ष्मी ने कहा कि सुधांजलि परिवार को अपने स्नेह और रचनात्मक भाव से उन्होंने सदा अभिषिक्त किया। अध्यक्षीय उद्गार में चितरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि शिवदास पांडेय सरल सहज हृदय के बड़े रचनाकार थे। उन्होंने साहित्य की कई विधाओं में लेखन किया। उनके उपन्यास भारतीय संस्कृति और परिवारिकता के प्रेरक ज्ञान हैं। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि मैं शिवदास जी से बराबर मिलता था। वे मुझे मार्ग निर्देशित करते थे। नगर विधायक रंजन कुमार ने कहा कि वह मेरे अभिभावक थे। डॉ. शिवदास पांडेय के विशद व्यक्तित्व-कृतित्व पर विस्तार से बोलते हुए संजय पंकज ने कहा कि शिवदास जी का व्यक्तित्व जितना सहज सरल और संवेदनशील था उनका कृतित्व उतना ही सघन, चिंतन प्रधान और व्यापक है। लेखिका डॉ. इंदु सिन्हा ने कई संस्मरण सुनाकर कहा कि उनका साहित्य भारतीयता का आलोक है। प्रियवंदा दास ने कहा कि शिवदास जी सबके लिए सद्भाव रखते थे। धन्यवाद डॉ. विकास नारायण उपाध्याय और आभार विवेक वैवस्वत ने व्यक्त किया।
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