
प्रत्याशियों ने तैनात किए औसतन 53-53 पोलिंग एजेंट
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों ने अपने पोलिंग एजेंटों पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया। कुल 90,740 मतदान केंद्रों पर 1,40,274 पोलिंग एजेंट तैनात किए गए थे। पहले चरण में 18 जिलों में 45,341 बूथ और दूसरे चरण में 20 जिलों में 45,399 बूथ बनाए गए थे।
मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। दो चरणों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों द्वारा अपने-अपने पोलिंग एजेंटों पर 20 करोड़ से अधिक की खर्च किए जाने का अनुमान है। दरअसल, प्रत्याशियों ने राज्य के 90,740 मतदान केंद्रों पर कुल एक लाख 40 हजार 274 पोलिंग एजेंट को लगाया गया था। यानी हर प्रत्याशी के औसतन 53-53 पोलिंग एजेंट थे। जानकारों के मुताबिक राजनीतिक दल व प्रत्याशियों की आर्थिक क्षमता के आधार पर इन एजेंटों को न्यूनतम एक से ढाई-तीन हजार रुपये तक भुगतान किए गए। पहले चरण में मुजफ्फरपुर समेत 18 जिलों के 121 सीटों के लिए हुए मतदान में 45,341 बूथ बनाए गए थे।
दूसरे चरण में 20 जिलों के 123 सीटों के लिए 45,399 बूथ बने थे। यानी दूसरे चरण में सिर्फ एक सीट और 58 बूथ अधिक थे। हालांकि, पहले चरण में बूथों पर तैनात 67,902 पोलिंग एजेंटों की अपेक्षा दूसरे चरण में अधिक संख्या 72,372 थी। राज्य के 38 जिलों में सर्वाधिक बूथों की संख्या में पटना के बाद मुजफ्फरपुर दूसरे नंबर पर है। जिले में 4186 बूथ बनाए गए थे। बूथ पर वोटरों की पहचान में अहम रोल मतदान के दौरान बूथ पर प्रत्याशी के प्रतिनिधि के तौर पर पोलिंग एजेंट रहते हैं। इनका मुख्य काम बूथ पर वोटर पर्ची का मिलान यानी मतदाताओं की पहचान करना रहता है। संदेह होने पर आपत्ति करने का अधिकार है। मतदान शुरू होने से पहले पीठासीन अधिकारी मॉक पोल में पोलिंग एजेंटों के सामने ईवीएम का डेमो दिखाते हैं। मतदान के बाद ईवीएम सील करते वक्त एजेंट का भी हस्ताक्षर होता है। 243 सीटों पर कुल 2616 प्रत्याशी मुजफ्फरपुर समेत विस की सभी 243 सीटों पर कुल 2616 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस लिहाज से हर सीट पर औसतन करीब 11-11 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। बहरहाल, अगले 14 नवंबर को चुनाव परिणाम सामने आने पर हार-जीत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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