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बखरा और वीरपुर गांव में पहुंचेंगी 13 देशों की 108 बौद्ध भिक्षुणी

बखरा और वीरपुर गांव में पहुंचेंगी 13 देशों की 108 बौद्ध भिक्षुणी

संक्षेप:

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता।बौद्ध धरोहरों को सहेजने के लिए शुरू यात्रा के क्रम में 13 देशों की 108 बौद्ध भिक्षुणी जिले के बखरा और वीरपुर गांव में प

Dec 15, 2025 01:34 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बौद्ध धरोहरों को सहेजने के लिए शुरू यात्रा के क्रम में 13 देशों की 108 बौद्ध भिक्षुणी जिले के बखरा और वीरपुर गांव में पहुंचेंगी। 22 दिसंबर को होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर डीएम ने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। कला संस्कृति अधिकारी को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। दरअसल, ईसा पूर्व छठी शताब्दी में महाप्रजापति गौतमी के नेतृत्व में की गई 300 किमी की ऐतिहासिक यात्रा को धरोहर के रूप में ये बौद्ध महिलाएं सहेज रही हैं। इसी को लेकर वे बिहार के बौद्ध स्थलों पर पहुंच रही हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के मुख्य सचिव के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार लाल ने इसको लेकर कला संस्कृति विभाग के सचिव समेत चार जिलों के डीएम को निर्देश दिया।

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पश्चिम व पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में इनकी यात्रा पहुंचेंगी। बुद्ध और उनकी पालक माता महाप्रजापति से जुड़े कई स्थल भुला दिए गए हैं। यात्रा का उद्देश्य समय के साथ लुप्त हो चुके इन महत्वपूर्ण बुद्ध संबंधी स्थलों को उजागर करना है। लाइट ऑफ बुद्ध धम्म फाउंडेशन इंटरनेशनल (एलबीडीएफआई) समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर 15 से 23 दिसंबर 2025 तक महाप्रजापति और 500 शाक्य महिलाओं के महान त्याग यात्रा के उद्घाटन समारोह का आयोजन कर रहा है। इसमें 13 देशों की 108 भिक्षुणियां (बौद्ध महिला भिक्षुणियां) भाग लेंगी। महाप्रजापति गौतमी बुद्ध की पालक माता थीं। परंपरा के अनुसार, महाप्रजापति गौतमी और 500 शाक्य स्त्रियों ने बुद्ध को संघ में शामिल करने के लिए राजी करने कपिलवस्तु (नेपाल) से वैशाली तक पैदल यात्रा की थी। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में महाप्रजापति के नेतृत्व में की गई यह 300 किमी की ऐतिहासिक यात्रा, विश्वभर की भिक्षुणियों और बौद्ध अनुयायियों के बीच एक साझा धरोहर है। इस ऐतिहासिक घटना का उद्देश्य भिक्षुणी संघ की स्थापना की ओर ले जाने वाले ऐतिहासिक मार्ग के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। इस आयोजन का उद्देश्य महाप्रजापति के ऐतिहासिक त्याग मार्ग को पुनर्जीवित करना है, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार के चार जिलों में है। इस तरह है कार्यक्रम: 20 दिसंबर: सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक-पश्चिम चंपारण के दारुआबारी वाल्मीकिनगर में प्रार्थना और औपचारिक पदयात्रा। (समूह कुशीनगर से यात्रा करेगी) 21 दिसंबर -पश्चिमी चंपारण के नंदनगढ़ स्तूप में प्रार्थना का अर्पण (सुबह 11 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक), पूर्वी चंपारण में अरेराज (दोपहर 2.30 बजे) और केसरिया (शाम 4 बजे)। 22 दिसम्बर: मुजफ्फरपुर के बखरा गांव में 8 से 9 बजे तक प्रार्थना का आयोजन, दोपहर 1:30 से 3:30 बजे तक वीरपुर में आयोजन। 23 दिसंबर-सुबह 8.30 से 10 बजे तक, बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय और स्मारक स्तूप, वैशाली।