Hindi NewsBihar NewsMuzaffarpur NewsBihar s Maternal Mortality Rate Rises to 104 per 1000 Health Department Expresses Concern
बिहार में मातृ मृत्यु दर एक साल में 13 अंक बढ़ी

बिहार में मातृ मृत्यु दर एक साल में 13 अंक बढ़ी

संक्षेप: बिहार में मातृ मृत्यु दर एक साल में 13 अंक बढ़कर 104 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने एनीमिया, हाइपरटेंसिब और ब्लीडिंग डिसॉर्डर को इसके प्रमुख कारण बताया है। सभी जिलों के सिविल सर्जनों को इस पर समीक्षा और रोकथाम के निर्देश दिए गए हैं। अगले पांच वर्षों में इसे घटाकर 70 करने का लक्ष्य है।

Mon, 17 Nov 2025 05:51 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बिहार में एक साल के अंदर मातृ मृत्यु दर 13 अंक तक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आयी है। वर्ष 2024-25 में मातृ मृत्युदर एक हजार में 91 थी जो वर्ष 2025-26 में अब तक एक हजार में 104 हो गई है। यह आंकड़ा अभी स्थिर है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर गहरी चिंता जताई है और सभी जिलों को इस पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया है। हालांकि विभाग का कहना है कि अगले पांच वर्षों में बिहार में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा घटकर 1000 में 70 हो जाएगा। विभाग ने वर्ष 1997-98 से लेकर अब तक की समीक्षा की है।

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वर्ष 1997-98 में बिहार में मातृ मृत्यु दर 1000 में 531 थी। क्षेत्रीय अपर निदेश स्वास्थ्य डॉ. सरिता शंकर का कहना है कि मातृ मृत्युदर को कम करने के लिए सारे उपाय किए जा रहे हैं। एनीमिया और ब्लीडिंग डिसार्डर है सबसे बड़ा कारण : स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सूबे में मातृ मृत्युदर का सबसे बड़ा कारण एनीमिया है। इसके बाद हाइपरटेंसिब डिसॉर्डर और ब्लीडिंग डिसॉर्डर का स्थान है। अप्रैल से अक्टूबर तक बिहार में एनीमिया से 31 प्रतिशत गर्भवतियों की मौत हुई तो हाईपरटेंसिब और ब्लीडिंग डिसार्डर से 29 प्रतिशत गर्भवतियों की जान गई है। एसकेएमसीएच की स्त्री व प्रसूती रोग विभाग की डॉ. विभा वर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एनीमिया और हाइपरटेंसिब और ब्लीडिंग डिसार्डर के मरीज हमेशा भर्ती रहते हैं। हाईपरटेंसिब डिसार्डर का नहीं पता चलता कारण : डॉ. वर्मा का कहना है कि गर्भवतियों में हाईपरटेंसिब डिसार्डर का कारण नहीं पता चल पाता है। बहुत बार कम उम्र में गर्भधारण करने या अधिक उम्र में गर्भधारण करने से यह समस्या होती है। इनकी बीपी हमेशा बढ़ा ही रहती है। बीपी बढ़े रहने से इस बीमारी से पीड़ित गर्भवतियों का ब्रेन हैमरेज हो जाता है जिससे उनकी मौत हो जाती है। यह बीमारी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक की महिलाओं में पायी जाती है। सीएस को करनी है मातृ मृत्युदर की समीक्षा : स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन (सीएस) को मातृ मृत्युदर की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। सीएस इसकी समीक्षा कर इसकी रोकथाम के लिए उपाये करेंगे। इसके अलावा मातृ मृत्यु के कारणों के बारे में राज्य मुख्यालय को भी जानकारी देंगे। हर महीने इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को भेजी जानी है।