
99 फीसदी वोटर ने कहा -अब मतदान से डर नहीं लगता साहब...
बिहार में केएपी सर्वे की रिपोर्ट से जाति की राजनीति खत्म होती नजर आ रही है। 95.2 फीसदी मतदाताओं ने जाति के आधार पर प्रत्याशी नहीं चुना। 99.3 फीसदी लोगों ने कहा कि वोट डालने में अब डर नहीं लगता। 2024 के चुनाव के लिए व्यक्तिगत पहचान और ईमानदारी पर अधिक ध्यान दिया गया है।
मुजफ्फरपुर, मुख्य संवाददाता। बिहार में जाति की राजनीति के दिन लद रहे हैं। यह तस्वीर केएपी (नॉलेज, एटीट्यूड एंड प्रैक्टिस) सर्वे की Èताजा रिपोर्ट में सामने आई है। साथ ही अब सूबे में मतदाताओं को मतदान के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं सताती है। सर्वे में 99.3 फीसदी लोगों ने कहा है कि अब वोट डालने में डर नहीं लगता है। लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में हुए केएपी सर्वे में राज्य के 95.2 फीसदी मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने प्रत्याशी को चुनते समय जाति को आधार नहीं बनाया था। जाति को आधार बताने वाले मतदाताओं की संख्या महज 4.8 फीसदी ही रही।
केएपी सर्वे राज्य की सभी 243 सीटों में से दो शहरी और दो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सबसे कम और सबसे अधिक मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों में किया गया था। सर्वे में कुल 60 हजार लोगों से सवाल किए गए थे। इनमें 37.5 फीसदी मजदूर और किसान, 26.7 फीसदी गृहिणी, 10.8 फीसदी छात्र और 10.6 फीसदी स्वरोजगार में लगे लोग शामिल थे। निर्वाचन विभाग ने 2024 की केएपी सर्वे रिपोर्ट जारी की है। इसमें 47.2 फीसदी मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत जान-पहचान वाले प्रत्याशियों को ही वोट किया। मतदाताओं में से 28.1 फीसदी ने कहा कि उन्होंने ईमानदार प्रत्याशी को वोट दिया था। सर्वे में शामिल मतदाताओं में से 12.4 फीसदी ने अनुभव के कारण प्रत्याशी को तरजीह दी तो 9.4 प्रतिशत ने प्रत्याशी की प्रतिबद्धता को वोट देने का आधार बताया। सर्वे से व्यक्ति और दल में प्राथमिकता के सवाल पर रोचक स्थिति सामने आई। इस सवाल पर 33.9 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि प्रत्याशी व्यक्तिगत रूप से उससे मिले थे, इसलिए उसे वोट दिया। वहीं, 32.9 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के समर्थक हैं, इसलिए उसी पार्टी के प्रत्याशी को वोट दिया। अच्छे उम्मीदवार के साथ धनबल को भी स्वीकारा: रिपोर्ट में अधिक वोटिंग वाले विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का जवाब भी दिलचस्प है। अधिक वोटिंग वाले क्षेत्र के 32.8 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि अच्छे उम्मीदवार के कारण लोगों ने वोटिंग में उत्साह दिखाया, जबकि 22.4 फीसदी ने अधिक वोटिंग वाले क्षेत्र में धनबल की महत्ता को स्वीकार किया। बॉक्स: अखबार और पत्रिका से आयी सबसे अधिक जागरूकता केएपी सर्वे रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। सर्वे में शामिल 60 हजार लोगों में से 59.5 फीसदी ने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी का मुख्य स्रोत अखबार और पत्रिका रही। इसमें मतदाता जागरूकता भी शामिल है। वहीं, 15.9 फीसदी लोगों ने कहा कि जागरूकता वाहन के कारण उनका ध्यान राजनीतिक प्रक्रिया पर गया, जबकि 15.1 फीसदी लोग होर्डिंग और फ्लेक्स से प्रभावित हुए।

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