अतिथि प्राध्यापकों के समायोजन की उठी मांग
बिहार में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन दर 17 प्रतिशत है, जिसे सरकार 50% करने की योजना बना रही है। वर्तमान में 20 लाख विद्यार्थी और केवल 7,500 प्राध्यापक हैं। अतिथि प्राध्यापकों ने विधान परिषद में अपनी...

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। उच्च शिक्षा में अभी बिहार का सकल नामांकन दर 17 प्रतिशत है, जिसे सरकार बढ़ाकर 50% करना चाहती है। 17% सकल नामांकन दर से अधिक उच्च शिक्षा में लगभग 20 लाख विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनके लिए महज 7,500 प्राध्यापक हैं। अभी प्राध्यापक विद्यार्थी अनुपात 250 विद्यार्थियों पर एक प्राध्यापक का है, जो दर्शाता है कि बीआरए बिहार विवि समेत अन्य विवि में भी प्राध्यापकों की घोर कमी है। ऐसे में अतिथि प्राध्यापकों का समायोजन उपयुक्त होगा। यह मांग शनिवार को बिहार विधान परिषद में आयोजित संवाद में बीआरए बिहार विवि के अतिथि प्राध्यापकों ने उठाई। सभी विश्वविद्यालयों के अतिथि प्राध्यापक प्रतिनिधियों ने कहा कि कल्याणकारी और रोजगार देनेवाली सरकार के साथ बिहार के समस्त अतिथि प्राध्यापक खड़े हैं।
बिहार विधान परिषद सभागार में उच्च शिक्षा में अतिथि प्राध्यापकों की भूमिका विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए अतिथि प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि विगत छह-सात वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में ये अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनकी नियुक्ति यूजीसी के मापदंडों के अनुसार आरक्षण रोस्टर का ध्यान रखते हुए विश्वविद्यालय चयन समिति द्वारा की गई है। इनकी मांग बिल्कुल जायज है। उच्च शिक्षा को गति देने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार सरकार सकारात्मक और संवेदनशील है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास और रोजगार केंद्रित सरकार से इन अतिथि प्राध्यापकों को आशा है कि उनके न्यायपूर्ण मांग पर विचार करते हुए उनकी सेवा को 65 वर्ष तक के लिए समायोजित करेगी। इस संदर्भ में विधान परिषद की शिक्षा समिति ने सरकार को अनुशंसा पत्र भेजा है। सभापति ने अतिथि प्राध्यापकों को भरोसा दिलाया कि न्यायप्रिय और सकारात्मक सोच वाली बिहार सरकार अतिथि प्राध्यापकों के हित में जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगी। संवाद कार्यक्रम में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर, मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के अध्यक्ष डॉ. बच्चा रजक, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. मुकेश प्रसाद निराला, जेपी विश्वविद्यालय छपरा के अध्यक्ष डॉ. हरिमोहन, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के अध्यक्ष डॉ. आदित्य आनंद ने अपनी मांगों के समर्थन में अपने विचारों को रखा।
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