एईएस की ऑटोमेटिक बायोकेमिकल मशीन से होगी जांच
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में एईएस मरीजों की जांच अब ऑटोमेटिक बायोकेमिकल मशीन से होगी। यह मशीन एक घंटे में 150 मरीजों की जांच कर सकेगी। पहले की मशीनें खराब थीं, जिससे जांच में देरी होती थी। इसके अलावा, चमकी बुखार को लेकर संध्या चौपाल का आयोजन भी किया गया है।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। एसकेएमसीएच में एईएस मरीजों की जांच अब ऑटोमेटिक बायोकेमिकल मशीन से होगी। अधीक्षक डॉ महेश प्रसाद ने यह मशीन मंगाई है। यह मशीन पीकू की लैब में रहेगी। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कुमारी विभा ने बताया कि ऑटोमेटिक मशीन से एक घंटे में 150 मरीजों की जांच हो सकेगी। इससे एईएस पीड़ित मरीजों के सारे एंजाइम की जांच होगी। इसके अलावा लीवर, किडनी, लिपिड प्रोफाइल और सीबीसी की जांच हो सकेगी। इस मशीन के आने पर जांच रिपोर्ट भी जल्द मिल सकेगी।एसकेएमसीएच के पीकू की लैब में जांच के लिए पहले दो मशीनें थीं। इनमें एक मशीन सेमीऑटोमेटिक है और दूसरी खराब पड़ी है।
दोनों मशीनों के ठीक से नहीं चलने से जांच और रिपोर्ट मिलने में परेशानी हो रही थी। इसलिए अधीक्षक ने नई मशीन का ऑर्डर बीएमएसआईसीएल को भेजा है। प्राचार्य ने बताया कि एक हफ्ते के भीतर मशीन आ जाएगी। उधर, एसकेएमसीएच में शनिवार को होने वाली एईएस की समीक्षा बैठक टल गई। यह बैठक अब 10 अप्रैल को होगी।एईएस को लेकर संध्या चौपाल की शुरुआत:चमकी बुखार और एईएस को लेकर शनिवार को जिले में संध्या चौपाल की शुरुआत हुई। संध्या चौपाल के लिए डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 373 पंचायतों में अधिकारियों की तैनाती की है। शनिवार को मुख्य कार्यक्रम मुशहरी के मनिका बिशनपुर चांद स्थित हाई स्कूल परिसर में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, विकास मित्र, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि व आम लोग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत डीएम, डीडीसी श्रेष्ठ अनुपम, सीएस सुधीर कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया।चमकी के लक्षण दिखे तो तुरंत ले जाएं अस्पताल:डीएम ने कहा कि चमकी बुखार से निपटने के लिए प्रशासनिक तत्परता के साथ-साथ जनसहभागिता भी जरूरी है। किसी बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण दिखे तो बिना देरी उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचाएं। डीएम ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की। कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका व जीविका दीदियों को घर-घर जाकर 0 से 15 वर्ष तक के बच्चों की वार्डवार सूची तैयार करने और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने को कहा।
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