एईएस: अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति और एंबुलेंस को रखें मुस्तैद
मुजफ्फरपुर में एईएस को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक ने समीक्षा बैठक की। सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में दवा, उपकरणों, और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की मॉनिटरिंग पर भी चर्चा हुई। एईएस से मृत्यु दर को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता एईएस को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने शुक्रवार को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक की और तैयारी का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति और एंबुलेंस को मुस्तैद रखने का निर्देश दिया। बैठक के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसकेएमसीएच के पीकू और बोचहां सीएचसी का भी निरीक्षण किया। कार्यपालक निदेशक ने पीकू में जाकर तैयारी के बारे में जानकारी ली। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से तैयारी से संबंधित अब तक की गई सभी गतिविधियों, संसाधनों की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
बताया गया कि एईएस से निपटने के लिए जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों, चिकित्सा पदाधिकारियों, आईसीडीएस वर्कर्स, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का चरणबद्ध प्रशिक्षण देने की तैयारी है। बैठक में दवा, उपकरण एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि जिलास्तर पर आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पताल में ग्लूकोज, एंटीबायोटिक, एंटीपायरेटिक, ऑक्सीजन एवं अन्य आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इस दौरान अस्पतालों में बेड, आईसीयू सुविधा, ऑक्सीजन सप्लाई एवं एम्बुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। कार्यपालक निदेशक ने कहा कि मरीजों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की होगी निगरानी : बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की प्रतिदिन मॉनिटरिंग दर्पण एप के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। इससे सेवा में पारदर्शिता आएगी तथा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित पदाधिकारी और कर्मी एलर्ट एवं एक्टिव मोड में रहकर कार्य करें। विभागीय समन्वय पर विशेष जोर कहा कि एईएस की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न विभागों की सहभागिता आवश्यक है। बैठक में जीविका, आईसीडीएस, शिक्षा, पंचायत राज, नगर निकाय एवं अन्य विभागों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। जीविका दीदियों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता संदेश पहुंचाने की प्लानिंग है। आईसीडीएस सेविकाओं एवं सहायिकाओं को बच्चों के पोषण स्तर पर विशेष निगरानी रखने तथा कुपोषित बच्चों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में बच्चों को चेतना सत्र में एईएस के संबंध में जानकारी देने का निर्देश दिया गया। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रत्येक पंचायत में वाहन टैगिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। यह व्यवस्था इस उद्देश्य से की जा रही है कि जरूरत पड़ने पर तत्काल वाहन उपलब्ध हो सके और मरीज को समय पर उपचार मिल सके। मृत्यु दर को शून्य करना लक्ष्य : बैठक में दोहराया गया कि जिले का लक्ष्य एईएस से मृत्यु दर को शून्य करना है। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया। कार्यपालक निदेशक ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान, त्वरित इलाज, पर्याप्त दवा उपलब्धता और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से एईएस पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें और दैनिक आधार पर प्रगति की समीक्षा करें।
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