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22 अप्रैल, 2021|2:32|IST

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समाज के नीचले स्तर तक हो शिक्षा की पहुंच, बनानी होगी ऐसी नीति

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वैश्विक महामारी के समय टेक्नोलॉजी एजुकेशन एक सार्थक पहल है। इसकी अनिवार्यता आज के समय में काफी है। ये बातें रविवार को अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय ने कही।

रोल ऑफ टेक्नोलॉजी इन एजुकेशन विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में मुख्य वक्ता प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी यूएसए के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ किसलय कौशिक ने कोरोना काल में शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी के समीकरण को विस्तार देने के लिए लर्निंग टूल्स, कोलेवेरेटिभ प्लेटफॉर्म, डिजिटल बुक्स की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस क्रमण काल में हमें ऐसी नीति बनानी होगी कि शिक्षा की पहुंच समाज के नीचले स्तर तक हो। प्राचार्य डॉ. कनुप्रिया ने लॉकडाउन में कॉलेज द्वारा संचालित कक्षाओं की चर्चा की और इसे विस्तार देने की चुनौती को समय का तकाजा कहा।

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी व्यक्ति की संवेदना का चित्रण

अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के दूसरे सत्र में फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य भाषा और संवेदना पर मुख्य वक्ता के रूप में नामचीन लेखिका दिल्ली विवि की प्राध्यापिका डॉ. अनामिका ने रेणु को वंचितों की भाषा को मंचित करने वाला विरल रचनाकार कहा। उन्होंने कहा कि रेणु का भाषिक ऐश्वर्य ही उनके पात्रों की संघर्ष चेतना को एक उजास देता है। विशिष्ट वक्ता कथाकार राकेश बिहारी ने कहा कि रेणु की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता है एक व्यक्ति की संवेदना को पूरे समूह की संवेदना से जोड़ना। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. पकंज कुमार और दूसरे सत्र का संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. पूनम सिंह ने किया।

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  • Web Title:Access to education at the bottom of society such a policy has to be made