मौसम की बेरुखी: सदर अस्पताल में उमड़ी मरीजों की भीड़, सामान्य दिनों की तुलना में 40% बढ़ा लोड

Newswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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​मुंगेर, निज संवाददाता। जिले में पिछले कुछ दिनों से मौसम के मिजाज में लगातार

मौसम की बेरुखी: सदर अस्पताल में उमड़ी मरीजों की भीड़, सामान्य दिनों की तुलना में 40% बढ़ा लोड

​मुंगेर, निज संवाददाता। जिले में पिछले कुछ दिनों से मौसम के मिजाज में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बीच अचानक हो रहे बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। आलम यह है कि मुंगेर सदर अस्पताल में इन दिनों मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की आमद में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।​ओपीडी

में पैर रखने की जगह नहीं, पर्ची काउंटर पर अफरा-तफरीः​अस्पताल परिसर में सुबह आठ बजे से ही रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों और उनके परिजनों की लाइन लग जा रही है। स्थिति यह है कि ओपीडी के बाहर गैलरी में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। डॉक्टर के कक्ष के बाहर कतार में खड़े मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी और उमस के कारण कतार में खड़े मरीजों, विशेषकर बुजुर्गों और गोद में बच्चे लिए महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।​वायरल और डिहाइड्रेशन के मामले सबसे अधिक​सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीज वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले में संक्रमण और बदन दर्द की शिकायत लेकर आ रहे हैं। वहीं, दोपहर की तेज धूप के कारण डिहाइड्रेशन और डायरिया के मामलों में भी तेजी आई है। अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दिन औसतन 500 से 700 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा 400 के करीब रहता था। अस्पताल के मेडिसिन और पीडियाट्रिक (शिशु रोग) विभाग में सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है।​बच्चे और बुजुर्ग हो रहे आसान शिकारः​बदलते मौसम ने सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को अपनी चपेट में लिया है। सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमन कुमार का कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण इस आयु वर्ग के लोग संक्रमण की चपेट में जल्दी आ रहे हैं। शिशु रोग वार्ड के बाहर अपने बच्चों को दिखाने आईं माताओं का कहना है कि बच्चों को अचानक तेज बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत हो रही है। अस्पताल के डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।​डॉक्टरों की सलाह: बचाव ही सबसे बड़ा उपचारः​सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि वे खान-पान और रहन-सहन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:​भरपूर पानी पिएं: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस घोल, नींबू पानी और ताजे फलों के रस का सेवन करें।​धूप से बचें: दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचें। यदि निकलना जरूरी हो, तो सिर को ढक कर रखें।​बासी भोजन न करें: गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है, इसलिए हमेशा ताजा और सुपाच्य भोजन ही करें।​पूरी नींद लें: वायरल संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर को पर्याप्त आराम और स्वच्छ वातावरण में रखें।​दवाओं की उपलब्धता और विशेष इंतजाम​बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। ओपीडी में डॉक्टरों की उपस्थिति की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी मरीज को बिना इलाज के वापस न जाना पड़े। आपातकालीन वार्ड में भी अतिरिक्त बेड और ओआरएस की व्यवस्था की गई है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल राहत दी जा सके। ​मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य सिविल सर्जन डॉ राजू ने लोगों से अपील की है कि यदि बुखार या दस्त के लक्षण दिखें, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क करें। लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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