असरगंज प्रखंड के सत्ती स्थान गांव में 400 वर्षो से नहीं मनायी जाती होली
असरगंज प्रखंड के सजुआ पंचायत के एक गांव में पिछले 400 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है। यहां की मान्यता है कि पहले एक महिला के पति की मौत के बाद उसने आत्मदाह कर लिया था। इस घटना के बाद से गांव वाले होली मनाने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस दिन अनहोनी होती है।

असरगंज, निज संवाददाता। असरगंज प्रखंड में एक ऐसा भी गांव है, जहां करीब 400 वर्षों से अनहोनी के भय से होली नहीं मनायी जाती है। यह गांव असरगंज प्रखंड स्थित सजुआ पंचायत का सती स्थान गांव है। होली नहीं मानाने के पीछे जो कारण पता चला है। वह हैरान करने वाला है। पूरी कहानी गांव में स्थित सती स्थान मंदिर से जुड़ी है। इस गांव के बुजुर्ग शालीग्राम सिंह, अशोक मंडल, सुरेंद्र सिंह सहित कई लोगों से बात करने पर पता चला कि लगभग 400 वर्ष पूर्व इस गांव में कुछ दांगी समाज के लोग रहते थे। उस वक्त होली के दौरान एक महिला के पति की मृत्यु हो गयी थी।
उस व्यक्ति की जैसे ही अर्थी उठी उसकी पत्नी ने भी प्राण त्याग दिया। महिला में इतनी दैविक शक्तियां थी कि, उसके शरीर में स्वयं अग्नि ने उत्पन्न ले लिया और जलकर राख हो गई। उनकी समाधि सती स्थान मंदिर के रुप में आज भी मौजूद है। उसी स्थान को सती स्थान मंदिर के नाम से लोग जानते हैं, जो आस्था का केन्द्र है। गांव की बुजुर्गो ने बताया कि उन्हें याद भी नहीं है कि, इस गांव में कभी होली मनाई गई थी। हमारे पूर्वजों ने भी बताया कि कभी इस गांव में होली नहीं मनायी गयी है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति उस दिन होली मनाना चाहता है। उसके साथ कोई न कोई अनहोनी हो जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि, इस गांव की बेटी शादी के बाद दूसरे घर जाती है, तो वहां वह वहां होली मनाती है। लेकिन इस गांव का कोई भी लोग चाहे बाहर ही रहते हों, होली नहीं मनाते हैं। होली के दिन रोज की तरह सामान्य भोजन ही घर में मनता है।
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