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खड़गपुर: 18 पंचायत के लिए 6 पंचायत सचिव ही पदस्थापित

खड़गपुर: 18 पंचायत के लिए 6 पंचायत सचिव ही पदस्थापित

संक्षेप:

हवेली खड़गपुर प्रखंड में पंचायत सचिवों की कमी गंभीर प्रशासनिक समस्या बन गई है। इस कमी के कारण विकास योजनाएं जैसे मनरेगा और आवास योजना में देरी हो रही है। एक सचिव के पास दो से पांच पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार है, जिससे कार्य में बाधा आ रही है। ग्रामीणों को दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

Dec 16, 2025 12:24 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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हवेली खड़गपुर, निज संवाददाता। पंचायत सचिवों की कमी हवेली खड़गपुर प्रखंड के लिये एक गंभीर प्रशासनिक समस्या बनी हुई है। इस कमी के कारण पंचायतों के दैनिक कामकाज और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कई बाधाएं आ रही हैं। पंचायत सचिव की अनुपलब्धता से ग्रामीण स्तर पर निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। विकास योजनाओं में देरी मनरेगा , आवास योजना और सात निश्चय जैसी महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय, निवास और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न होने के कारण ग्रामीणों को प्रखंड (ब्लॉक) कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। काम का अतिरिक्त बोझ: वर्तमान में एक पंचायत सचिव के पास दो से 5 पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार है, जिससे वे किसी भी पंचायत को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

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सचिव की अनुपस्थिति में ग्राम सभा की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो पातीं, जिससे स्थानीय स्तर पर योजना बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। प्रखंड में 18 पंचायत है। लेकिन यहां महज 6 पंचायत सचिव पदस्थापित है। इन्हीं 6 पंचायत सचिव के जिम्मे 18 पंचायत का कार्यभार है। एक पंचायत सचिव के पास तीन से पांच पंचायत आवंटित है। इससे पंचायत के कार्य के निष्पादन में परेशानी होती है। पंचायत के जिम्मे पंचायत के विकास सहित निवास, जाति, आय, जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए जांच रिपोर्ट के अलावा सभी प्रकार के पेंशन का भी जांच रिपोर्ट भेजना पड़ता है। पंचायत सचिव की कमी से समय पर जांच रिपोर्ट भी नहीं हो पाता है। पंचायत सचिव समय पर पंचायत सरकार भवन में भी नहीं बैठ पाते हैं। पंचायत सचिव से किसी काम के लिए पंचायतवासियों को कई कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है। या फिर उन्हें खोजने के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है। क्या कहते हैं लोग अर्जुन मांझी, दिवाकर यादव, संजय कुमार, पूनम देवी, सीता देवी आदि ने बताया कि किसी को दो पंचायत तो किसी को पांच पंचायत का कार्यभार पंचायती राज विभाग मुंगेर द्वारा दिया गया है। प्रभार वितरण में भी धांधली के कारण आज हम लोगों को बेवजह कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इधर, पंचायत सचिव का कहना है कि ज्यादा पंचायत का प्रभार रहने से काम में परेशानी तो होती ही है। ऊपर से अधिकारियों का भी डांट सुननी पड़ती है। समय पर काम का निष्पादन करने में परेशानी झेलनी पड़ती है। बीडीओ प्रियंका कुमारी ने बताया कि जो पंचायत सचिव यहां प्रतिनियुक्त है उन्हीं के बीच जिला से पंचायतों को आवंटित कर कार्य का निष्पादन कराया जाता है। कमी को लेकर वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया है।