ऋषिकुंड मलमास मेला: 14 को बंदोबस्ती, 17 से मेला शुरू, तीन दिन में तैयारी होगी बड़ी चुनौती
मुंगेर, विश्व प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेला की बंदोबस्ती 14 मई को होगी, जबकि मेला 17 मई से शुरू होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 दिवसीय मेले की तैयारी तीन दिन में करना मुश्किल है। प्रशासन ने युद्धस्तर पर तैयारी करने का आश्वासन दिया है।

मुंगेर ,निज प्रतिनिधि। विश्व प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेला की बंदोबस्ती 14 मई को फिर से होगी, जबकि मेला 17 मई से शुरू हो जाएगा। बंदोबस्ती और मेला शुरू होने के बीच सिर्फ तीन दिन का अंतर होने से व्यवस्था करना बंदोबस्तधारी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। गौरतलब है कि 15 दिनों पूर्व किए गए बंदोबस्ती को तकनीकी कर्म से रद्द कर दिया गया है। प्रशासन ने फिर से 14 मई को बंदोबस्ती किये जाने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 दिवसीय विशाल मेले की तैयारी तीन दिन में कर पाना साधारण बात नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर काम करना होगा। -------
तीन दिन में 30 दिन के मेले की तैयारी असंभव जैसी :
स्थानीय अरविंद शर्मा, शंकर चौधरी, मनोज सिंह, राजा सिंह, अशोक चौरसिया आदि ने बताया कि मलमास मेला में लाखों श्रद्धालु आते हैं। दुकानों का आवंटन, बिजली, पानी, सफाई, सुरक्षा, शौचालय, स्नान घाट की व्यवस्था, बैरिकेडिंग और यातायात प्लान तीन दिन में पूरा करना बेहद मुश्किल है। पहले बंदोबस्ती के बाद कम से कम 10-15 दिन का समय मिलता था। इस बार समय कम होने से अव्यवस्था की आशंका है। लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल तैयारी शुरू करने की मांग की है।
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डीडीसी बोले- युद्धस्तर पर होगी तैयारी, नहीं होगी परेशानी :
इस मामले पर डीडीसी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार सिंह ने कहा, "मेले की महत्ता को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। बंदोबस्ती से पहले ही आधारभूत संरचना का काम शुरू कर दिया जाएगा। बिजली, पानी, सफाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा की टीम 24 घंटे तैनात रहेगी। बंदोबस्तधारी को भी हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होने देंगे।" उन्होंने बताया कि सभी विभागों के साथ समन्वय बैठक कर ली गई है।
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प्रशासन के भरोसे टिकी निगाहें, दुकानदारों में असमंजस :
कम समय मिलने से दुकानदारों में भी असमंजस है। कई दुकानदारों ने कहा कि स्टॉल लगाने, सामान मंगाने और सेटअप तैयार करने में ही 4-5 दिन लग जाते हैं। तीन दिन में सबकुछ करना मुश्किल है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋषिकुंड मेले की ख्याति देशभर में है। अव्यवस्था से जिले की छवि खराब होगी। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की तैयारी पर टिकी हैं। प्रशासन का दावा है कि मेले को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। 17 मई से शुरू होकर यह मेला एक माह तक चलेगा.
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