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मुंगेर

विभिन्न प्रखंडों में धान की फसल कीटों एवं रोगों से प्रभावित

हिन्दुस्तान टीम,मुंगेरPublished By: Newswrap
Tue, 28 Sep 2021 06:01 AM
विभिन्न प्रखंडों में धान की फसल कीटों एवं रोगों से प्रभावित

मुंगेर। एक संवाददाता

धान की फसल में विभिन्न तरह के रोग एवं कीट लगना आम बात है। लेकिन इसके नियंत्रण के लिए सतत निगरानी एवं उचित दवाइयों का समय पर प्रयोग आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि, अभी धान की कुछ फसलें गभ्भा की अवस्था में हैं अथवा अगात किस्म में बालियां निकल रही हैं। ऐसे में धान में लगने वाले रोगों एवं कीटों के कारण उत्पादन में 6 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। यह बात पौधा संरक्षण विभाग, मुंगेर के सहायक निदेशक अवधेश प्रसाद गुप्ता ने ह खड़गपुर, संग्रामपुर, तारापुर एवं असरगंज प्रखंड के धान खेतों का निरीक्षण कर लौटने के बाद किसानों के लिए सलाह जारी करते हुए कही।

श्री गुप्ता ने कहा कि, ह खड़गपुर, संग्रामपुर, तारापुर एवं असरगंज प्रखंड के कई धान खेतों में शीथब्लाईट (पत्र लांछन) रोग, झुलसा या पत्र अंग मारी रोग, गंधी कीट एवं तना छेदक कीट के आक्रमण देखे गए हैं। ऐसे में यदि किसान समय रहते इन कीटों एवं रोगों का प्रबंधन नहीं करेंगे तो उनका उत्पादन प्रभावित होगा। समय पर इन रोगों एवं कीटों का प्रबंधन करने से उत्पादन में हानि नहीं होती है। ऐसे में किसानों को धान में लगने वाले इन विभिन्न रोगों एवं कीटों के पहचान का तरीका बताते हुए उन्होंने प्रबंधन के लिए आवश्यक सलाह दिया है।

रोगों एवं कीटों के उपचार:

श्री गुप्ता ने रोग एवं कीट प्रबंधन के तहत सलाह देते हुए कहा कि, शीत ब्लाइट या पत्र लांछन रोग के लगने पर कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 1 ग्राम प्रति ली या भौलिडामाइसिन 3 एल अथवा हेक्साकोनाजोल 5 ईसी 2 मिली प्रति ली की दर से पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। जबकि, झुलसा रोग के लगने पर किसानों को खेत में जमा पानी निकाल देना चाहिए एवं यूरिया का प्रयोग रोग ठीक होने तक नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही किसान स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम प्रति 10 ली पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

वहीं गंधी कीट का उपचार बताते हुए उन्होंने कहा कि, इसके लिए 1 एकड़ में 10 से 20 जगह के कराया मेंढक को सूती कपड़े में बांधकर जमीन से 1 फीट ऊपर डंडा के सहारे लटका देना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसान क्लोरपायरीफॉस 1.5 प्रतिशत धूल या मालाथियान 5 धूल 10 किग्रा प्रति एकड़ की दर से सुबह में धान में छिड़काव कर सकते हैं। जबकि, तना छेदक कीट के रोकथाम के लिए सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि, इस कीट के आक्रमण की स्थिति में किसानों को खेत में 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप प्रति हे की दर से लगाना चाहिए। इसके साथ पक्षी बैठका एवं शाम के समय प्रकाश फंदा भी लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, इसके जगह पर किसान कार्बाफ्यूरॉन 3 दानेदार, 10 किग्रा प्रति एकड़ अथवा कार्टॉप हाइड्रोक्लोराइड 8 किग्रा प्रति यह कर किधर से खेत में नवमी यानी 3 से 5 इंच पानी के रहने पर प्रयोग किया जा सकता है।

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