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फंस सकती है बारह अधिकारियों की गर्दन

फंस सकती है बारह अधिकारियों की गर्दन

एशिया प्रसिद्ध रेल इंजन कारखाना जमालपुर के 155 साल के इतिहास में पहली बार वैगन गोलमाल का दाग इनके दामन में लग गया है। बीते तीन सालों में यहां पीओएच (मरम्मत) के लिए लाए गये वैगनों में गोलमाल कर न सिर्फ कारखाना अधिकारियों ने अपनी जेबें गर्म की, बल्कि लोहा माफियाओं को भी मालामाल कर दिया। सूत्रों की माने तो यदि निष्पक्ष जांच हुई तो निश्चित ही एक दर्जन अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। बुधवार को जब इसकी जांच शुरू हुई तो कारखाना प्रशासन के होश फाख्ता हो गये। इसके अलावा रेलमंत्रालय से वीजीलेंस टीम, आरपीएफ के मुख्य सुरक्षा आयुक्त एसके सिन्हा टीम, आरडीएसओ लखनऊ की टीम का कारखाना में आना शुरू हो गया है। इतने बड़े घोटाले के पीछे कौन कौन रेल के वरीय अधिकारी व कर्मचारी हैं, इसकी रिपोर्ट तैयार होने लगी है। वैगन विभाग स्क्रैप के कस्टोडियन विभाग को दोषी मान रहा है, तो कस्टडीयन वैगन विभाग को। एक दूसरे पर आरोपी-प्रत्यारोप का भी खेल कारखाना के विभिन्न विभागों में शुरू हो गया है। यही कारण है कि गायब वैगन की जानकारी देने में यहां के वरीय अधिकारी भी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। क्या है गायब वैगनों का घोटाला रेल इंजन कारखाना जमालपुर के तत्कालीन मुख्य कारखाना प्रबंधक अनिमेष कुमार सिन्हा के पांच साल के कार्यकाल में वर्ष 2013 से ही यह खेल शुरू हो गया था। उस वक्त से लेकर वर्ष 2016 तक वैगन के डिप्टी के रूप में बीपी वर्णवाल, तरुण कुमार, टीके साईं, सीपी शर्मा चंद महीनों के लिए योगदान दिया था। शॉप कर्मियों की माने तो कारखाना के डब्लूआरएस वन, टू, थ्री व फोर में डैमेज बॉक्सन वैगन, बोरबन वैगन सहित अन्य तरह के वैगनों का पीओएच (मरम्मत) के लिए लाया गया था। इनमें कुछ हैवी रिपेयरिंग, मीडियम रिपयरिंग एवं लॉयेस्ट रिपयेरिंग कार्य होना था। अधिकारियों ने ऐसे ठोस वैगनों को स्क्रैप में डाल दिया, तथा पूर्व के स्क्रैप वैगनों पर ठोस वैगनों का नंबर प्रिंट कर मरम्मत किया गया। हालांकि स्क्रैप वैगनों की मरम्मत में कारखाना प्रशासन और रेलवे को दुगना आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। बावजूद इसके ठोस और अच्छी वैगन को स्क्रैप में भेजकर रेलवे को मुनाफा देने का भी दम भरा गया। यही कारण है कि ज्यादा से ज्यादा स्क्रैप बिक्री में विभाग बेस्ट अवार्ड से नवाजा गया था। वैगन की जांच शुरू क्यों व कैसे हुई अनिमेष कुमार सिन्हा के स्थानांतरण होते ही वैगन शॉप में इसकी चर्चा शुरू हो गयी। मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचा, और वैगन की खोजबीन शुरू हुई। प्रशासन ने आरपीएफ इंस्पेक्टर केएस नानरा को हेडक्वार्टर भेज दिया, तथा यहां भागलपुर के इंस्पेक्टर अनुपम कुमार को सुरक्षा का दायित्व दिया गया। इसके बाद रेलवे विजिलेंस और मुख्य सुरक्षा आयुक्त की टीम ने स्क्रैप विभाग स्थल, वैगन विभाग स्थल के कार्य क्षेत्र से लेकर कागजात की भी जांच की। हालांकि उन्होंने वैगन से संबंधित रिपोर्ट की तलब की है। कारखाना प्रशासन भी किसी पेच में फंसना नहीं चाहती है, इसलिए जो वर्तमान स्थिति है, उसकी रिपोर्ट बनाकर हेडक्वार्टर को भेजने की तैयारी में जुट गया है। आज आएंगे सीएमई कोलकाता हेडक्वार्टर कोलाकाता के चीफ मेकेनिकल इंजीनियर आरएस घोषाल शुक्रवार को कारखाना पहुंच रहे हैं, तथा यहां की गतिविधियों का जायजा लेंगे। सीएमई के आने की सूचना मिलते ही कारखाना प्रशासन ने हर विभाग को अलर्ट कर दिया है। इसके लिए सीडब्लूएम एके पाण्डे ने कारखाना पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आवाश्यक निर्देश जारी किया है। आरडीएसओ की टीम 6 को आरडीएसओ लखनऊ की एक विशेष टीम आगामी 6 जून को कारखाना पहुंचेगी, तथा यहां तीन दिनों तक कारखाना के वैगन संबंधित कार्य स्थल की जांच करेगी। टीम में मुख्य रूप से वैगन डायरेक्टर होंगे। क्या कहते हैं अधिकारी पूर्व रेलवे कोलकाता के सीपीआरओ रवि महापात्रा बताते हैं कि वैगन मिसिंग मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच निष्पक्ष कराने के लिए जोनल स्तर की टीम, वीजीलेंस व रेलवे बोर्ड की टीम भिड़ी हुई है।

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  • Web Title:Neck of twelve officials may be trapped