राष्ट्रीय लोक अदालत में 1777 मामलों की सुनवाई, 834 निष्पादित
मुंगेर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें 1777 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें 834 मामलों का निष्पादन किया गया। 35 वर्ष पुराने वन विभाग के मामले सहित कई पुराने मामलों का समाधान हुआ। प्रधान न्यायाधीश ने लोक अदालत को न्याय दिलाने का सरल और त्वरित माध्यम बताया।

मुंगेर, एक संवाददाता। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर, मुंगेर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), मुंगेर के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष डीएलएसए आलोक गुप्ता ने की, जबकि संचालन सचिव दिनेश कुमार ने किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंकिंग, दावा एवं बीमा, वन, सुलहनीय आपराधिक एवं दीवानी, राजस्व, सेवा, पेंशन, वैवाहिक, मोटरयान दुर्घटना, विद्युत, जल विपत्र, दूरभाष, श्रम, खनन, मजदूरी एवं यातायात चालान से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। आमलोगों की सुविधा एवं अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन के लिए 12 पीठों का गठन किया गया था तथा 3 सहायता केंद्र बनाए गए थे। इस लोक अदालत में कुल 1777 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें 834 मामलों का निष्पादन किया गया। इनमें 362 शमनीय न्यायिक मामले एवं 772 विवाद-पूर्व वाद शामिल थे। आपसी समझौते के आधार पर कुल 2 करोड़ 16 लाख 31 हजार 869 रुपये के दावों का निपटारा कराया गया। इनमें से केवल बिजली विभाग का ही 100 मामला निपटाया गया। इसमें बिजली विभाग को जुर्माना के रूप में लगभग 640000 रुपए प्राप्त हुए। इसी तरह से लोक अदालत में परिवहन विभाग के चालान से संबंधित 40 मामले लाए गए थे। यह सभी मामले 50 प्रतिशत छूट पर कुल 43500 रुपए में निपटाए गए। लोक अदालत के उद्घाटन के मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक गुप्ता ने कहा कि, लोक अदालत न्याय दिलाने का सरल, सस्ता और त्वरित माध्यम है। उन्होंने कहा कि, लोक अदालत में न किसी की हार होती है और न ही जीत, बल्कि आपसी सहमति से विवादों का समाधान होता है। उन्होंने न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अरविंद कुमार शर्मा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अमित रंजन उपाध्याय, राकेश कुमार, विकास मिश्रा, गौतम कुमार यादव, कुमारी मनीषा, पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद, विधिज्ञ संघ अध्यक्ष शशि शेखर सिंह एवं सचिव त्रिपुरारी प्रसाद वर्मा सहित कई न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे。
केस स्टडी:
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्षों पुराने मामलों का भी निपटारा हुआ। इनमें से कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं।
केस स्टडी-1:
35 वर्ष पुराने वन विभाग के मामले का समाधान:
वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा वर्ष- 1991 में दर्ज लकड़ी चोरी के मामले का राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। 35 वर्षों से लंबित इस मामले में छह अभियुक्तों को 300-300 रुपये अर्थदंड देकर मुक्त कर दिया गया।
केस स्टडी- 2:
25 वर्ष पुराने वन वाद का निष्पादन:
वर्ष- 2001 में दर्ज वन विभाग के एक अन्य मामले का भी समझौते के आधार पर निपटारा हुआ। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने पर 1200-1200 रुपये अर्थदंड के साथ मामला समाप्त कर दिया गया।
केस स्टडी- 3:
22 वर्ष पुराने परिवहन विभाग के मामले का निपटारा:
खड़गपुर थाना कांड संख्या-78/2004, जो करीब 22 वर्षों से लंबित था, का भी राष्ट्रीय लोक अदालत में निष्पादन हुआ। अभियुक्त द्वारा 4 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।
केस स्टडी- 4:
20 वर्ष पुराने पड़ोसी विवाद का हुआ अंत:
खड़गपुर थाना क्षेत्र में पड़ोसियों के बीच वर्ष- 2006 से चल रहे विवाद का भी राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर समाधान कराया गया।
इन न्यायिक पदाधिकारियों की लगी पीठें
राष्ट्रीय लोक अदालत में एडीजे सप्तम संतोष कुमार, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो विमलेन्दु कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अदिति गुप्ता, एसीजेएम कुमार पंकज, आकांक्षा, रूपेश कुमार, एसडीजेएम स्वस्ति यादव सहित न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शैलेन्द्र कुमार, किरण कुमारी, प्रदीप कुमार, शालिनी किरण एवं अनन्या की पीठों का गठन किया गया था।


