मुंगेर विश्वविद्यालय की अपनी जमीन पर अब भी ग्रहण,

Newswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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मुंगेर विश्वविद्यालय की स्थापना को 8 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन स्थायी परिसर का निर्माण अभी भी कागजी प्रक्रिया में फंसा है। रामनगर की जमीन पर विवादों के कारण अधिग्रहण में देरी हो रही है। प्रशासन चड़ौन गांव की जमीन पर नजर गड़ाए हुए है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।

मुंगेर विश्वविद्यालय की अपनी जमीन पर अब भी ग्रहण,

मुंगेर, एक संवाददाता। मुंगेर विश्वविद्यालय की स्थापना को 8 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उसका स्थायी परिसर आज भी कागजों, बैठकों और भूमि सर्वेक्षणों के बीच उलझा हुआ है। उच्च शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने का सपना संजोए यह विश्वविद्यालय अब तक अपने भवन के लिए निश्चित जमीन तय नहीं कर पाया है। भूमि अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया और प्रशासनिक पेच ने इस महत्वपूर्ण परियोजना पर मानो ग्रहण लगा दिया है। ज्ञात हो कि, पूर्व में रामनगर थाना क्षेत्र की जमीन को विश्वविद्यालय परिसर के लिए चयनित किया गया था। उम्मीद जगी थी कि, लंबे इंतजार के बाद मुंगेर विश्वविद्यालय को अपना स्थायी ठिकाना मिलेगा, लेकिन जमीन के स्वामित्व, रैयती दावों और मुआवजे से जुड़े विवादों ने पूरी प्रक्रिया को ठहराव में डाल दिया। प्रशासनिक स्तर पर कई दौर की चर्चा हुई, परंतु जमीन अधिग्रहण की दिशा में निर्णायक प्रगति नहीं हो सकी। परिणाम यह हुआ है कि, विश्वविद्यालय परिसर निर्माण का मामला फिर अनिश्चितता के घेरे में चला गया है।

अब प्रशासन की नजर

अब प्रशासन की नजर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चड़ौन गांव की जमीन पर टिक गई है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में भूमि उपलब्धता, सीमांकन और अधिग्रहण की संभावनाओं को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण और प्रारंभिक प्रक्रियाओं की चर्चा ने एक बार फिर उम्मीद जगाई है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि, क्या चड़ौन मुंगेर विश्वविद्यालय का अंतिम ठिकाना बनेगा या यह प्रस्ताव भी पूर्व की योजनाओं की तरह फाइलों में ही सीमित रह जाएगा।

फिलहाल स्थिति

फिलहाल, स्थिति यह है कि, मुंगेर विश्वविद्यालय आज भी अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे अपनी शैक्षणिक गतिविधियां संचालित कर रहा है। छात्रों और शिक्षकों को आधुनिक परिसर, शोध सुविधाओं और समुचित आधारभूत संरचना का इंतजार है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग मानते हैं कि, स्थायी परिसर के बिना विश्वविद्यालय का समग्र विकास प्रभावित हो रहा है। इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि, आखिर मुंगेर विश्वविद्यालय का अपना भवन कब बनेगा? प्रशासनिक घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच फंसा यह सपना अभी सपना ही बना रहेगा या हकीकत का भी रूप लेगा? इन प्रश्नों का जवाब यहां के छात्र, शिक्षक एवं आम जनता जवाब मांग रहे हैं।

कहते हैं अधिकारी

कहते हैं अधिकारी:

मुंगेर विश्वविद्यालय के लिए रामनगर थाना क्षेत्र में पूर्व से निश्चित एवं चिन्हित जमीन का ही अधिग्रहण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के लिए किसी दूसरी जगह पर जमीन नहीं देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय के लिए दूसरे जगह जमीन देखने की बात केवल अपवाह है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अगले तीन से चार महीने में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

-निखिल धनराज, डीएम, मुंगेर

सामान्य प्रश्न

मुंगेर विश्वविद्यालय की स्थापना को कितने वर्ष हो चुके हैं?
मुंगेर विश्वविद्यालय की स्थापना को 8 वर्ष बीत चुके हैं।

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