मुंगेर विश्वविद्यालय ने कक्षा व्यवस्था पर कसा शिकंजा,
से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने का सीधा मंच मिलेगा। कॉलेजों को निर्देश, रूटीन भेजें और चस्पा करें: कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय द्वारा जारी पत्र में सभी कॉलेजो

मुंगेर, एक संवाददाता। मुंगेर विश्वविद्यालय ने अपने कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को नियमित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों को अपने-अपने विषयों का कक्षा रूटीन सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि, इस कदम से कक्षा संचालन में अनियमितता पर रोक लगेगी और छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने का सीधा मंच मिलेगा। कॉलेजों को निर्देश, रूटीन भेजें और चस्पा करें: कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय द्वारा जारी पत्र में सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि, वे साप्ताहिक एवं सेमेस्टरवार कक्षा रूटीन तैयार कर उसकी प्रति विश्वविद्यालय कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
इसके साथ ही कॉलेज परिसर में चार-पांच प्रमुख स्थानों पर रूटीन को प्रदर्शित करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्र समय और विषय की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। छात्र अब सीधे कर सकेंगे शिकायत: नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर- 9199628734 जारी किया है। यदि किसी दिन निर्धारित समय पर कक्षा का संचालन नहीं होता है, तो छात्र तय प्रारूप में शिक्षक का नाम, विषय, पीरियड और तिथि अंकित कर शिकायत भेज सकेंगे। शिकायत के साथ मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उस पर विचार नहीं किया जाएगा। कॉलेज प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि, शिकायत का प्रपत्र सूचना पट्ट पर उपलब्ध रहे। राजभवन के निर्देशों का हवाला: इस मामले में कुलसचिव ने स्पष्ट किया है कि, यह पहल राजभवन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आलोक में की गई है। अधिकारियों का कहना है कि, इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि शिक्षकों की जवाबदेही भी तय होगी और कक्षाएं नियमित रूप से संचालित होंगी। हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर कुछ शिक्षकों और सीनेटरों ने व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि, विश्वविद्यालय के कई कॉलेज दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं और बड़ी संख्या में छात्र 25-30 किलोमीटर दूर से आते हैं। रोजाना यात्रा पर होने वाला खर्च आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बड़ी चुनौती है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि, डिजिटल संसाधनों, ऑनलाइन कक्षाओं, एमओओसी और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाओं के अभाव में दूर रहने वाले छात्रों को वैकल्पिक शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका मानना है कि, समस्या को केवल शिक्षकों की अनुपस्थिति से जोड़कर देखना समाधान नहीं है।
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