जिले में 9745.186 हेक्टेयर में विभिन्न गरमा फसलों की होगी खेती, खेती को ले लक्ष्य निर्धारित
मुंगेर जिले में रबी फसल की कटाई के बाद गरमा फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग ने विभिन्न गरमा फसलों के लिए 9745.186 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। गरमा फसलें अप्रैल से जून में उगाई जाएंगी।

मुंगेर, निज प्रतिनिधि । रबी अभियान के तहत फसल की कटनी का कार्य अब कुछ ही दिनों में शुरू किया जाएगा। कटाई पूर्ण होने के बाद जिले में गरमा मूंग, गरमा तिल, गरमा मक्का व ढैंचा की खेती की जाएगी। कृषि विभाग रबी की समाप्ति व खरीफ की खेती प्रारंभ होने के बीच की अवधि में गरमा फसल की बोआई की तैयारियों में अभी से लग गया है। इसके लिए सभी प्रखंडों के लिए बकायदा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के अनुरूप सभी प्रखंडों में गरमा मूंग, तिल, मक्का व ढैंचा की खेती की जाएगी। गरमा फसल की खेती को लेकर किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कम अवधि की खेती में किसान अधिक से अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकें, इसके लिए बीज की खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जिले में 9745. 186 हेक्टेयर में विभिन्न गरमा फसलों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। मूंग, 5735. 01 हेक्टेयर में, मक्का 2722.52 हेक्टेयर, उड़द 620.15 हेक्टेयर, ढैंचा 521.93 हेक्टेयर, गन्ना 56. 511 हेक्टेयर तथा अन्य गरमा फसल हेक्टेयर में लक्ष्य रखा गया है। वहीं कृषि विभाग की ओर से जिले को अब तक बीज उपलब्ध नहीं कराया गया है। जल्द ही बीज को लेकर आवेदन प्रक्रिया शुरू किये जाने की संभावना है। ---------- गर्मा खेती से होने वाले फायदा के संबंध में किसानों को किसान सलाहकार कर रहे जागरूक : किसानों को इन फसल की खेती से होने वाले लाभ की जानकारी के लिए किसान सलाहकार गांवों में जाकर किसानों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। गौरललव है कि वर्ष 2025 में किसानों ने गरमा खेती के मामले में काफी उत्साह दिखाया था। यही कारण रहा कि पिछले वर्ष जिले में व्यापक पैमाने पर गरमा मूंग व मक्का की खेती की गई थी। किसानों के उत्साह को देखते हुए इस साल इसके रकबा को बढ़ा दिया गया है। ------- अप्रैल से जून माह की अवधि गरमा फसल के लिए काफी उपयुक्त: गरमा मूंग, उड़द, मक्का, ढैंचा की फसल को तैयार होने में मात्र तीन माह का वक्त लगता है। कृषि विभाग ने बताया कि अप्रैल से जून माह की अवधि गरमा फसल के लिए सबसे उपयुक्त होती है। इस बीच किसानों के खेत रबी व खरीफ की खेती के बीच की अवधि में खाली रहते हैं। इसी खाली अवधि गरमा फसल के लिए सबसे उपयुक्त होती है। इसी खाली अवधि में गरमा मूंग, गरमा मक्का, गरमा तिल व अन्य गरमा फसलों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद होती है। ------- रबी फसल की कटाई के बाद गरमा फसल की बुवाई में किसान लगेंगे। जिले में विभिन्न गरमा फसल के लिये लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया गया है। कुल मिलाकर जिले में 9745.186 हेक्टेर में गरमा फसल लगाई जाएगी। इसके लिये किसानों को प्रेरित भी किया जा रहा है। सुष्मिता, जिला कृषि पदाधिकारी मुंगेर।
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