
मुंगेर में अतिक्रमण बना अभिशाप : फुटपाथ गायब, सड़कें जाम, प्रशासनिक सख्ती सिर्फ शुरुआत तक सीमित,
मुंगेर शहर में अतिक्रमण वर्षों से समस्या बना हुआ है। फुटपाथ पर कब्जा और दुकानों का फैलाव प्रशासन की ढुलमुल कार्रवाई के कारण बढ़ता जा रहा है। वर्तमान मेयर के तीसरे कार्यकाल में भी स्थिति बिगड़ती जा रही है। नागरिकों का जीवन जाम और असुविधाओं से प्रभावित है, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप अतिक्रमण हटाने की कोशिशों को बाधित कर रहा है।
मुंगेर, रणजीत कुमार ठाकुर। मुंगेर शहर में अतिक्रमण वर्षों से नासूर बन चुका है। फुटपाथ पर कब्जा, सड़क पर फैलती दुकानें और प्रशासन की ढुलमुल कार्रवाई ने शहर की व्यवस्था को बुरी तरह जकड़ लिया है। कई नगर आयुक्त आए और गए, मेयरों के कार्यकाल बदले, योजनाएं बनीं- लेकिन, मुंगेर बाजार आज भी अतिक्रमण से कराह रहा है। राज्य सरकार की कैबिनेट द्वारा प्रमंडल मुख्यालय में टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत मुंगेर प्रमंडल मुख्यालय के मुंगेर में भी टाउनशिप विकसित किया जाएगा। लेकिन, मुंगेर में जहां आज तक शहर अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका, बल्कि यह समस्या और बढ़ती ही जा रही है, वहां तो टाउनशिप की बात करना बेमानी ही होगा।
क्योंकि, मुंगेर शहर का शायद ही कोई बाजार ऐसा हो जो अतिक्रमण से मुक्त हो। वर्षों से यह समस्या जड़ जमाए हुए है और बढ़ती ही जा रही है, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप ने इसे और गहरा दिया है। कई नगर आयुक्तों ने अपने कार्यकाल की शुरुआत जोर-शोर से की, मगर कुछ ही दिनों में उनकी कार्रवाई ठंडी पड़ गई। परिणामस्वरूप अतिक्रमण हटाने की पहल हमेशा शुरुआती उत्साह से आगे नहीं बढ़ पाई। वर्तमान मेयर का यह तीसरा कार्यकाल है, लेकिन शहर की स्थिति पहले से अधिक बदतर हो चुकी है। फुटपाथ, जो पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए थे, दुकानदारों की अतिरिक्त दुकानदारी के लिए सुरक्षित जगह बन चुके हैं। मजबूरी में लोग सड़कों पर चलने को विवश हैं, जबकि सड़कें भी अब पैदल यात्रियों और वाहनों दोनों के लिए असुविधाजनक हो चुकी हैं। मंगलवार को भी पूरे शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिक्रमण के कारण दिनभर जाम लगा रहा, जिससे आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त रहा। राजनीति और वोट-बैंक की विवशताओं ने भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को प्रभावित किया है। लोग खुलकर कहते हैं कि, मुंगेर बाजार पूरी तरह राजनीति का शिकार हो चुका है। जब-जब हटाने की कोशिश होती है, राजनीतिक दबाव बढ़ जाता है और अभियान रुक जाता है। यहां दिलचस्प बात यह है कि, वर्तमान डीएम ने, जब वे नगर आयुक्त थे, बहुत सख्ती से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की थी। उनके जाने के बाद मामला ठंडा पड़ गया। अब वे डीएम के रूप में पुनः मुंगेर आए हैं, जिससे शहरवासियों को उम्मीद जगी थी कि, अतिक्रमण के खिलाफ फिर से कड़ा कदम उठेगा, लेकिन अब तक इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में शहरवासी सवाल पूछ रहे हैं कि, मुंगेर कब बनेगा साफ-सुथरा और सुंदर? कब मिलेगा फुटपाथ पर चलने का अधिकार और कब खत्म होगा शहर को जाम की गिरफ्त में रखने वाला अतिक्रमण? शहर प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक दबावों के बीच यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। कहती हैं नगर आयुक्त: शहर एवं बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। आगे भी अभियान चलाया जाएगा। लेकिन, अतिक्रमण से स्थायी मुक्ति तभी मिलेगी जब यहां से अलग वेंडर जोन बनेगा। इसके लिए पूर्व से ही प्रयास जारी है। समुचित जगह पर जमीन की खोज कर वेंडर जोन बनाया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। -शिवाक्षी दीक्षित, नगर आयुक्त, मुंगेर नगर निगम, मुंगेर

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