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27 जनवरी, 2020|12:18|IST

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मधु से पहचान बनाने में मुंगेर पीछे

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मुंगेर जिला मधु ब्रांडिंग के नाम अपनी पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो पाया। तत्कालीन डीएम आनंद शर्मा ने मधु ब्रांडिंग के लिए खादी ग्रामोद्योग को केवीके में 4000 स्क्वायर फीट जमीन भी उपलब्ध कराई गयी थी । लेकिन मधु ब्रांडिग का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि ढाई करोड़ की लागत से प्रति दिन केवीके में 1 क्विंटल मधु उत्पादन के लिये प्लांट लगाया जाना था। लेकिन अधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण मुंगेर शहद ब्रांडिंग के नाम से अपनी पहचान बनाने में सफल होने से वंचित रह गया। जिसका मलाल अब भी किसानों को है।मुंगेर के तत्कालीन डीएम आनंद शर्मा मुंगेर को मधु ब्रांडिंग से पहचान दिलाने के लिये भरपूर प्रयास किये थे। लेक्रिन उनके तबादले के बाद मधु ब्रांडिग प्रयास धरी की धरी रह गई।

भीम बांध सहित विभिन्न पिछड़े इलाकों के किसानों को करना था लाभान्वित:- मधु उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये जिले के नक्सल प्रभावित भीमबांध सहित अन्य पिछड़े क्षेत्रों के गरीब युवा एवं युवतियों को मधु उत्पादन के लिये प्रेरित कर उसे लाभान्वित करना मुख्य उद्देश्य था। लेकिन यह उद्देश्य धरी की धरी रह गई। योजना को वृहत रूप नहीं दी जा सकी।

केवीके मुंगेर में मधु ब्राडिंग के लिये उपलब्ध करायी गयी थी जमीन: जिले में उत्पादित मधु की ब्राडिंग के लिये मुंगेर के कृषि विज्ञान केन्द्र में जमीन उपलब्ध खादी भंडार विभाग को 4000स्क्वॉयर फीट जमीन भी उपलब्ध करायी गयी थी।

लेकिन मधु ब्राडिंग के लिये प्लांट नहीं लगाया जा सका। कुल मिलाकर तत्कालीन डीएम श्री शर्मा के प्रयास को पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया गया।

क्या कहते हैं किसान: प्रगतिशील किसान बुलबुल सिंह, आनंद मोहन, रुपेश कुमार , पंकज चौधरी ने कहा कि मधु उत्पादन और उसका ब्रांडिंग के लिये तत्कालीन डीएम आनंद शर्मा द्वारा किये गए कार्यों को वर्तमान अधिकारियों ने कोई तवज्जो नहीं दिया। अगर इसके लिये अधिकारी काम करते तो निश्चित रूप से मुंगेर मधु ब्रांडिंग के नाम से जाना जाता।