हाथी का दांत साबित हो रहे मुंगेर नगर निगम के हीट वेव शिविर, सुविधाओं के नाम पर सिर्फ शेड
सिर्फ शेड - शिविरों में राहगीरों के लिए न तो पीने के पानी का किया गया है इंतजाम, न ही किसी मेडिकल टीम की है तैनाती - हीट वेव की गंभीर स्थिति को देखते

मुंगेर, निज संवाददाता। जिले में आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी के बीच आम लोगों को राहत देने के प्रशासनिक दावे धरातल पर हवा हवाई साबित हो रहे हैं। भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) के प्रकोप को देखते हुए नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर बनाए गए हीट वेव राहत शिविर महज 'हाथी का दांत' साबित हो रहे हैं। शिविरों के नाम पर खानापूर्ति करते हुए सिर्फ टेंट तो तान दिए गए हैं, लेकिन इन शिविरों में राहगीरों के लिए न तो पीने के पानी का इंतजाम है और न ही किसी मेडिकल टीम की तैनाती की गई है।
आलम यह है कि लाखों की आबादी वाले इस शहर में ये शिविर अब आम राहगीरों के बजाय रिक्शा चालकों के विश्राम और स्टैंड के रूप में तब्दील हो चुके हैं।जिलाधिकारी के दावों को ठेंगा दिखा रहा निगम प्रशासनःउल्लेखनीय है कि जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव की गंभीर स्थिति को देखते हुए बीते 25 मई को जिलाधिकारी निखिल धनराज ने नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता को कड़े निर्देश जारी किए थे। जिलाधिकारी ने नगर निगम क्षेत्र के कम-से-कम आठ प्रमुख और व्यस्तम जगहों पर टेंट लगाकर ठंडा पेयजल, ओआरएस घोल और आपातकालीन मेडिकल टीम की सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने को कहा था।प्रशासन द्वारा शहर के जिन आठ प्रमुख स्थलों को इसके लिए चिह्नित किया गया था, उनमें, मुंगेर रेलवे स्टेशन, एक नंबर ट्रैफिक, भगत सिंह चौक, कौड़ा मैदान, पोलो ग्राउंड 6 नंबर गेट, चंडिका स्थान, आरडी एंड डीजे कॉलेज तथा पूरबसराय ओवर ब्रिज के समीप का स्थल शामिल हैं। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद निगम प्रशासन ने आनन-फानन में इन जगहों पर शेड तो खड़े कर दिए, लेकिन इसके बाद जिम्मेदार अधिकारी सुविधाओं की सुध लेना ही भूल गए।पारा 41 डिग्री के पार, बेहाल हैं राहगीरःमौसम विभाग के अनुसार, मुंगेर में वर्तमान में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले तीन दिनों तक स्थिति ऐसी ही जानलेवा बनी रहेगी। चिलचिलाती धूप और गर्म थपेड़ों के कारण दोपहर के वक्त सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले राहगीरों, रिक्शा चालकों और ठेला चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कौड़ा मैदान के समीप स्थानीय राहगीर रमेश कुमार, प्रदीप सिंह, सुनीता देवी, योगेंद्र साह, सुनील कुमार सहित अन्य ने बताया कि सोचा था शिविर में थोड़ा ठंडा पानी मिल जाएगा और धूप से राहत मिलेगी, लेकिन यहां तो बूंद भर पानी भी नसीब नहीं है। अधिकारी बस कागजों पर ही व्यवस्था दुरुस्त रखते हैं।रिक्शा चालकों का स्टैंड बना शिविरः'हिंदुस्तान' की टीम ने जब शहर के प्रमुख स्थलों पर बनाए गए इन शिविरों का रियलिटी चेक किया, तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली मिली। भगत सिंह चौक और पूरबसराय ओवर ब्रिज के पास बने शेड के नीचे न तो कोई पानी का मटका या जार दिखा और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी नजर आया। बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण आम राहगीर इन शिविरों की तरफ रुख भी नहीं कर रहे हैं। खाली पड़े इन शेडों का उपयोग अब स्थानीय रिक्शा और ई-रिक्शा चालक अपनी गाड़ियां खड़ी करने और आराम करने के लिए कर रहे हैं।इस घोर लापरवाही से साफ जाहिर होता है कि आम जनता की सेहत और सुरक्षा को लेकर नगर निगम प्रशासन बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। यदि समय रहते इन शिविरों में पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा किट (ओआरएस आदि) की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में हीट वेव के कारण कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। स्थानीय जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
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