भूकंप का अलर्ट: सायरन की गूंज के साथ शुरू हुआ मेगा मॉकड्रिल, सड़कों पर दौड़ने लगी टीमें
मुंगेर में गुरुवार की सुबह भूकंप जैसी आपदा से निपटने के लिए वृहद मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। प्रशासन ने छह प्रमुख स्थानों पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के साथ लाइव रेस्क्यू अभ्यास किया। पोलो मैदान को कंट्रोल सेंटर बनाया गया, जहां 13 विशेष टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।

मुंगेर, निज संवाददाता। मुंगेर में गुरुवार की सुबह उस समय हड़कंप जैसी स्थिति दिखनी शुरू हुई, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के सायरन गूंजने लगे। घबराएं नहीं, यह कोई वास्तविक आपदा नहीं, बल्कि जिले को भूकंप जैसी विभीषिका से बचाने की महा तैयारी थी। मुंगेर जिला प्रशासन और एनडीएमए के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को शहर के 6 प्रमुख स्थानों पर वृहद मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। युद्धस्तर पर बचाव: इन 6 जगहों पर हुआ लाइव ऑपरेशन: प्रशासन ने शहर के छह ऐसे पॉइंट्स को चुना था, जहां जान-माल का अधिक जोखिम रहता है। इन जगहों पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लाइव रेस्क्यू कर रही थी।
समाहरणालय भवन में नोडल पदाधकिारी प्रिया कुमारी के नेतृत्व में सरकारी तंत्र की तत्परता की जांच हुई। यहां काम करने वाले कर्मियों और अपने काम से पहुंचे आम जनों को रेस्क्यू करने का लाव ऑपरेशन चलाया गया। बैजनाथ बालिका 2 उच्च विद्यालय में नोडल विश्वजीत कुमार तिवारी के नेतृत्व में स्कूली बच्चों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया। भारत पेट्रोल पंप पर आगजनी और विस्फोट जैसी स्थिति से निपटने का जीवंत अभ्यास हुआ। सदर अस्पताल में डॉ मो. फैजउद्दीन तथा उसकी पूरी टीम घायलों के तत्काल इलाज और ट्राइएज की व्यवस्था में लगे रहे। वहीं आदित्य विजन एवं बेलन बाजार क्वार्टर में मलबे में फंसे लोगों को निकालने का डेमो किया गया। पोलो मैदान बना कंट्रोल सेंटर: बचाव अभियान को दिशा देने के लिए पोलो मैदान को स्टेजिंग एरिया बनाया गया था। यहीं से एडीएम आपदा संजय कुमार के नेतृत्व में 13 विशेष टीमें संचालित हो रही थी और स्टेडियम में एक मॉडल राहत शिविर बनाया गया था, जहां भूकंप पीड़ितों के लिए भोजन, दवा और आश्रय का पुख्ता प्रबंध दिखाया गया। 13 विशेष टीमें संभाल रही मोर्चा: इस एक्सरसाइज के लिए प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी। 13 अलग-अलग कोषांगों का गठन किया गया था। जिसमें सुरक्षा व ट्रैफिक के पुलिस बल को सड़कों को क्लियर रखने का जिम्मा था। स्वास्थ्य विभाग के एम्बुलेंस और डॉक्टरों को क्विक रिस्पांस टीम में शामलि किया गया था। तकनीकी विभाग द्वारा बिजली, नगर निगम और संचार व्यवस्था की बहाली थी। पूरा मॉक ड्रिल दो राउंड में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिकारी हर मोर्चे पर समन्वय की बारीकी से जांच कर रहे थे, ताकि वास्तविक संकट के समय कमियों को शून्य किया जा सके। डीएम की अपील, घबराएं नहीं, सावधानी को समझें: जिलाधिकारी निखिल धनराज ने मॉकड्रिल के बाद पत्रकारों से कहा कि सुबह लगभग 8 बजे हमलोगों को सूचना प्राप्त हुई कि मुंगेर में 6 जगहों पर भूकंप के कारण मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। यह एक मॉक ड्रिल के तहत हम लोगों ने इस कार्य को आज किया था। हमने अपना जो इमरजेंसी रिस्पांस है, उसे कैलिब्रेट करने के लिए यह अभ्यास किया। जिन 6 जगहों पर नुकसान की सूचना मिली, वहां हमने तुरंत अपने स्टेजिंग एरिया से टीमों को रवाना किया। इसमें एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपदा मित्र और एसडीआरएफ की टीमें शामिल थीं। इन चिन्हित स्थलों से जो लोग रेस्क्यू करने लायक थे, उन्हें बचाकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों की पूरी टीम मुस्तैद थी। पर्याप्त संसाधन उपलब्ध था और घायलों का उपचार चल रहा था। क्षतिग्रस्त मकानों वाली जगहों पर कटर मशीन की टीमें भी भेजी गईं। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से हम लोगों को यह संदेश दिया गया कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में प्रशासन की क्या तैयारी है और आम जनता की क्या भूमिका होनी चाहिए। उनके साथ एसपी सैयद इमरान मसूद, एसडीए आपदा संजय कुमार, डीपीएम मो. फैजान सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। ------------ भूकंप के दौरान: जीवन रक्षक गाइडलाइन: 1. अगर आप घर के अंदर हैं:- झुकें: जैसे ही झटके महसूस हों, अपने हाथों और घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। ढकें: किसी मजबूत मेज या डेस्क के नीचे चले जाएं, ताकि गिरते हुए मलबे से सिर और गर्दन की रक्षा हो सके। पकड़े रहें: जब तक कंपन रुक न जाए, मेज के पैर को मजबूती से थामे रखें। कांच से दूर रहें: खिड़कियों, शीशों, झूमरों और भारी फर्नीचर से दूर रहें, जो गिर सकते हैं। लिफ्ट का प्रयोग न करें: भूकंप के दौरान कभी भी लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, सीढ़ियों का ही प्रयोग करें। 2. अगर आप घर के बाहर हैं: खुले मैदान में जाएं: इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों और बिजली के खंभों/तारों से जितना संभव हो दूर हट जाएं। सुरक्षित बैठें: जमीन पर बैठ जाएं और झटके रुकने का इंतजार करें। 3. अगर आप वाहन चला रहे हैं: गाड़ी रोकें: सुरक्षित स्थान देखकर वाहन को धीरे-धीरे रोकें। अंदर ही रहें: झटके रुकने तक वाहन के अंदर ही बैठें। पुलों, ओवरपास या बिजली के तारों के नीचे गाड़ी खड़ी न करें। भूकंप के बाद: क्या न करें: पैनिक न फैलाएं: अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के कोई जानकारी साझा करें। माचिस/लाइटर न जलाएं: भूकंप के कारण गैस पाइपलाइन लीक हो सकती है, इसलिए आग का प्रयोग न करें। टॉर्च का इस्तेमाल करें। क्षतिग्रस्त इमारतों में न जाएं: मुख्य झटके के बाद आफ्टरशॉक आने की संभावना रहती है, इसलिए कमजोर इमारतों से दूर रहें। फोन लाइनों को जाम न करें: केवल आपातकालीन स्थिति में ही कॉल करें, ताकि नेटवर्क जाम न हो। आपातकालीन किट में क्या रखें: पीने का पानी और कुछ सूखा राशन। प्राथमिक चिकित्सा किट और जरूरी दवाएं। बैटरी वाली टॉर्च और अतिरिक्त सेल। एक सीटी (मलबे में फंसने पर आवाज देने के काम आती है)।
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