
ग्रामीण चिकित्सक डॉ. द्रोणाचार्य ठाकुर ने मानवता की मिसाल पेश की
धरहरा के लकड़कोला गांव में एक आदिवासी व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया था और उसके परिजनों ने उसे छोड़ दिया था। ग्रामीण चिकित्सक डॉ. द्रोणाचार्य ठाकुर ने मानवता का परिचय देते हुए उसकी जान बचाई, निजी खर्च पर इलाज किया और उसकी हालत में सुधार किया।
धरहरा, एक संवाददाता। जब परिजन और समाज ने एक गंभीर रूप से झुलसे आदिवासी व्यक्ति से मुंह मोड़ लिया, तब ग्रामीण चिकित्सक डॉ. द्रोणाचार्य ठाकुर ने मानवता का परिचय देते हुए उसकी जान बचाई। यह मामला धरहरा प्रखंड की बंगलवा पंचायत अंतर्गत लकड़कोला गांव का है, जिसने पूरे क्षेत्र में समाजसेवा की एक प्रेरक मिसाल कायम की है। जानकारी के अनुसार, लकड़कोला गांव का एक आदिवासी व्यक्ति शराब के नशे में जलती हुई लकड़ी को गले लगा बैठा, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया। परिजनों द्वारा प्राथमिक उपचार किए जाने के बावजूद जब घाव से तेज दुर्गंध आने लगी, तो ग्रामीणों की सलाह पर उसे खेत-खलिहान में छोड़ दिया गया।
इलाज के अभाव में उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उसकी जान पर बन आई। इसी अमानवीय स्थिति की जानकारी जब ग्रामीण चिकित्सक डॉ. द्रोणाचार्य ठाकुर को मिली, तो उन्होंने बिना देर किए हस्तक्षेप किया। उन्होंने अपने निजी खर्च पर एक केयर टेकर की व्यवस्था की और स्वयं उपचार की पूरी जिम्मेदारी संभाली। नियमित देखभाल, दवाइयों और निरंतर निगरानी के चलते पीड़ित व्यक्ति की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और आज वह पूरी तरह स्वस्थ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉ. द्रोणाचार्य ठाकुर मूल रूप से बंगलवा गांव के ही रहने वाले हैं और लंबे समय से मानवीय सेवा से जुड़े हुए हैं। गरीब, असहाय और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं। कई बार वे अपने खर्च पर मरीजों को बाहर बेहतर चिकित्सकीय सुविधा भी दिलवाते हैं। ------------------------

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