खेल के दम पर मिली नौकरी, अब युवाओं के प्रेरणास्रोत बने नीरज

Newswrap हिन्दुस्तान, मुंगेर
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धरहरा, एक संवाददाता। कहते हैं कि, अगर इरादे मजबूत हों तो अभाव भी रास्ता नहीं रोक पाते। धरहरा के नीरज कुमार सिंह ने इस बात को अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा से साबित कर दिखाया। किसान परिवार से आने वाले 40 वर्षीय नीरज कुमार सिंह ने फुटबॉल और क्रिकेट दोनों खेलों में अपनी पहचान बनाई, लेकिन फुटबॉल ने उन्हें वह मुकाम दिलाया जिसकी बदौलत वर्ष 2006 में रेलवे में नौकरी मिली। आज वही नीरज गांव के दर्जनों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। वर्ष 1999 से खेल की दुनिया में कदम रखने वाले नीरज ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। आर्थिक तंगी इतनी थी कि, कई बार अभ्यास के लिए जरूरी संसाधन जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। राष्ट्रीय स्तर के ट्रायल में शामिल होने के दौरान किराये तक के पैसे नहीं थे, लेकिन जुनून ऐसा था कि, कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ते रहे। परिवार और समाज का सहयोग उनके हौसले को लगातार मजबूती देता रहा। फुटबॉल में बेहतर प्रदर्शन के कारण नीरज को राष्ट्रीय स्तर तक खेलने का अवसर मिला। उन्होंने संतोष ट्रॉफी के लिए भी खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम रहा कि, रेलवे में उन्हें नौकरी मिली। नौकरी मिलने के बाद उनके जीवन में स्थिरता आई, आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और समाज में एक नई पहचान बनी। सफलता हासिल करने के बाद भी उन्होंने खेल और अपने गांव से दूरी नहीं बनाई। आज भी प्रतिदिन मैदान पहुंचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। गांव स्तर पर टीम बनाकर वे 30 से 40 युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं और उन्हें खेल के प्रति जागरूक कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, नीरज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नौकरी मिलने के बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं आया। वे पहले की तरह ही युवाओं के बीच समय बिताते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। नीरज कुमार सिंह कहते हैं, ग्राउंड में मेहनत करें, एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। दिल से किए गए कार्य में उपलब्धि अवश्य मिलती है। उनकी यही सोच आज धरहरा के युवाओं के भीतर नए सपनों और उम्मीदों को जन्म दे रही है।

खेल के दम पर मिली नौकरी, अब युवाओं के प्रेरणास्रोत बने नीरज

धरहरा, एक संवाददाता। कहते हैं कि, अगर इरादे मजबूत हों तो अभाव भी रास्ता नहीं रोक पाते। धरहरा के नीरज कुमार सिंह ने इस बात को अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा से साबित कर दिखाया।

नीरज की पहचान

किसान परिवार से आने वाले 40 वर्षीय नीरज कुमार सिंह ने फुटबॉल और क्रिकेट दोनों खेलों में अपनी पहचान बनाई, लेकिन फुटबॉल ने उन्हें वह मुकाम दिलाया जिसकी बदौलत वर्ष 2006 में रेलवे में नौकरी मिली।

सपनों की पुर्ति

वर्ष 1999 से खेल की दुनिया में कदम रखने वाले नीरज ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

समर्थन और सफलता

परिवार और समाज का सहयोग उनके हौसले को लगातार मजबूती देता रहा। फुटबॉल में बेहतर प्रदर्शन के कारण नीरज को राष्ट्रीय स्तर तक खेलने का अवसर मिला।

समर्पण और प्रेरणा

नौकरी मिलने के बाद उनके जीवन में स्थिरता आई, आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और समाज में एक नई पहचान बनी।

युवाओं की प्रेरणा

आज भी प्रतिदिन मैदान पहुंचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। गांव स्तर पर टीम बनाकर वे 30 से 40 युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं और उन्हें खेल के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्न

नीरज कुमार सिंह किस दो खेलों में अपनी पहचान बनाई?
नीरज कुमार सिंह ने फुटबॉल और क्रिकेट दोनों खेलों में अपनी पहचान बनाई।

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