मुंगेर सदर अस्पताल के आईसीयू में एक्सपायर्ड पड़े हैं अग्निशामक सिलेंडर, मंडरा रहा खतरा

हिन्दुस्तान, मुंगेर
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लेंडर, मंडरा रहा खतरा - आपात स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए फायर एक्स्टिंग्विशर (अग्निशामक सिलेंडर) इसी साल जनवरी महीने में ही हो चुके हैं एक्सपायर

मुंगेर सदर अस्पताल के आईसीयू में एक्सपायर्ड पड़े हैं अग्निशामक सिलेंडर, मंडरा रहा खतरा

​मुंगेर । मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल के आईसीयू में बीते मंगलवार को आग लगने से 5 मरीजों की दर्दनाक मौत और 20 लोगों के झुलसने की भयावह घटना के बाद भी स्वास्थ्य महकमा नींद से जागने को तैयार नहीं है। अगर लापरवाही का यही आलम रहा, तो मुजफ्फरपुर जैसी भीषण त्रासदी को मुंगेर सदर अस्पताल में भी दोहराते देर नहीं लगेगी। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का आईसीयू वार्ड इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां भर्ती मरीजों की जान भगवान भरोसे है।

अस्पताली सुरक्षा पर चिंता

​जनवरी में ही एक्सपायर हो चुके हैं सिलेंडरः

सुरक्षा दावों की पोल खोली

​धरातल पर सुरक्षा दावों की पोल खोलती एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर मुंगेर सदर अस्पताल के आईसीयू से सामने आई है। यहां आपात स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए फायर एक्स्टिंग्विशर (अग्निशामक सिलेंडर) इसी साल जनवरी महीने में ही एक्सपायर हो चुके हैं। करीब पांच महीने का वक्त बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने इन्हें रिफिल कराने की जहमत नहीं उठाई।

सुरक्षा मामले में लापरवाही

​बड़ा सवाल: यदि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड में शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से आग लगती है, तो इन खाली और एक्सपायर्ड सिलेंडरों के भरोसे मरीजों की जान कैसे बचाई जाएगी?

सरकारी नियमों का पालन

​क्या कहता है सरकारी नियम?

​सरकारी नियमानुसार, किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान को निबंधन (रजिस्ट्रेशन) या उसके नवीनीकरण से पहले फायर सेफ्टी का 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जमा करना अनिवार्य होता है। बिना पुख्ता अग्निशामक व्यवस्था के किसी भी अस्पताल के संचालन की अनुमति नहीं है। लेकिन सदर अस्पताल में नियमों की धज्जियां खुद जिम्मेदार अधिकारी ही उड़ा रहे हैं।

अगली कदम

​जल्द कराई जाएगी जांच: सिविल सर्जन

​इस गंभीर लापरवाही और सुरक्षा में चूक के संबंध में जब मुंगेर के सिविल सर्जन डॉक्टर राजू से बात की गई, तो उन्होंने जल्द सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। सिविल सर्जन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जल्द ही सदर अस्पताल के सभी विभागों का विस्तृत फायर ऑडिट करवाया जाएगा। अस्पताल परिसर में जहां कहीं भी सुरक्षा मानकों में जो भी कमी पाई जाएगी, उसे तुरंत पूरा किया जाएगा। जिन वार्डों में अग्निशामक सिलेंडरों की रिफिलिंग की जरूरत है, वहां अविलंब रिफिलिंग होगी और जहां नए सिलेंडर लगाने की आवश्यकता है, वहां नए उपकरण इंस्टॉल किए जाएंगे।

मुजफ्फरपुर की घटना एक चेतावनी थी, लेकिन मुंगेर स्वास्थ्य विभाग की यह सुस्ती किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। वादों और आश्वासनों से इतर अब धरातल पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किसी बेगुनाह को अपनी जान न गंवानी पड़े।

मुद्दों की स्पष्टता

यदि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड में शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से आग लगती है, तो इन खाली और एक्सपायर्ड सिलेंडरों के भरोसे मरीजों की जान कैसे बचाई जाएगी?
इस समस्या का समाधान जल्दी सुरक्षा उपायों में सुधार करने में है। अस्पताल प्रबंधन को सुरक्षा मामलों पर ध्यान देने की जरूरत है।
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