देर रात पहुंची उत्सव मूर्ति, मुंगेर में पहली बार विराजेंगे तिरुपति बालाजी, तैयारी पूरी

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नाया जा रहा 69वां वर्षगांठ - कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई बड़ी हस्ती लेंगे भाग ​मुंगेर, निज संवाददाता। योग नगरी मुंगेर के इतिहास मे

देर रात पहुंची उत्सव मूर्ति, मुंगेर में पहली बार विराजेंगे तिरुपति बालाजी, तैयारी पूरी

​मुंगेर, निज संवाददाता। योग नगरी मुंगेर के इतिहास में 6 मई 2026 का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। यह अवसर न केवल आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का गवाह बनेगा, बल्कि दक्षिण और उत्तर भारत की सांस्कृतिक एवं दिव्य परंपराओं के मिलन का भी केंद्र होगा। परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी के मुंगेर पदार्पण के 69 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आगामी 6 मई को भव्य 'मुंगेर पदार्पण दिवस' और 'श्रीनिवास कल्याणोत्सवम्' का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् द्वारा संचालित भगवान श्री तिरुपति बालाजी की उत्सव मूर्ति पहली बार बिहार की धरती पर, विशेषकर मुंगेर पहुंच चुकी है。

69 साल पहले पड़ा था योग का बीजारोपणः

​उल्लेखनीय है कि 6 मई 1957 को स्वामी सत्यानंद सरस्वती एक परिव्राजक संन्यासी के रूप में पहली बार मुंगेर आए थे। बताया जाता है कि उत्तरवाहिनी गंगा ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया था। मुंगेर की इसी पावन धरा पर उन्होंने योग का बीजारोपण किया और 1963 में बिहार योग विद्यालय की स्थापना की। स्वामीजी के इसी संकल्प का प्रतिफल था कि साल 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने मुंगेर को आधिकारिक तौर पर 'योग नगरी' घोषित किया था। अब उनके आगमन के उनहत्तर वर्षों बाद, मुंगेर के नागरिक विश्व योग पीठ और संन्यास पीठ के सहयोग से इस दिन को उत्सव के रूप में मना रहे हैं।

पादुका दर्शन और पोलो मैदान में होंगे दर्शनः

​भक्तों की सुविधा के लिए भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए दो अलग-अलग समय और स्थान निर्धारित किए गए हैं:

​पादुका दर्शन (संन्यास पीठ): प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक भक्त यहां दर्शन कर सकेंगे। यहां श्रीनिवास कल्याणोत्सवम् के तहत विद्वान पंडितों द्वारा विधिवत पूजा और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

​पोलो मैदान: आम जनमानस की भारी भीड़ को देखते हुए दोपहर 4 बजे से शाम 6 बजे तक भगवान के दर्शन पोलो मैदान में भी सुलभ होंगे।

​तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् से आए विशेष पंडितों की टोली इस पूरे कल्याणोत्सवम् के कर्मकांडों को संपन्न कराएगी। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि चूंकि तिरुपति बालाजी की मूल मूर्ति तिरुमाला में ही रहती है, अतः उनकी 'उत्सव मूर्ति' को मुंगेर लाया जा रहा है, जो उनकी कृपा का ही संचार माध्यम है।

ड्रेस कोड का पालन अनिवार्यः

​कार्यक्रम की गरिमा और पवित्रता बनाए रखने के लिए आयोजकों ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पादुका दर्शन परिसर में प्रवेश के लिए पारंपरिक भारतीय परिधान अनिवार्य किया गया है। पुरुषों के लिए धोती या कुर्ता-पायजामा तथा महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-कमीज निर्धारित किया गया है। साथ ही, सभी भक्तों से परिसर के भीतर सद्विहार और सत्कर्म की मर्यादा बनाए रखने की अपील की गई है।

भक्ति और योग का अद्भुत मिलनः

​मुंगेर पदार्पण दिवस के मुख्य स्वागताभिलाषी स्वामी कैवल्यानन्द सरस्वती, गौरव शर्मा, सत्येश शर्मा और मुंगेर के नागरिकों ने इसे बिहार के लिए एक ऐतिहासिक गौरव का विषय बताया है। मां गंगा के तट पर स्थित पादुका दर्शन परिसर में आयोजित यह महोत्सव योग, भक्ति और दैवीय नियति का एक दुर्लभ संगम होगा, जहां एक ओर गुरुदेव की स्मृतियां होंगी तो दूसरी ओर साक्षात् भगवान श्रीनिवास की उपस्थिति। प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा इस बड़े आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

ड्रोन और लेजर लाइट शो से जीवंत होगी ऐतिहासिक विरासतः

​ऐतिहासिक नगरी मुंगेर की पौराणिक गाथाएं आज शाम आधुनिक तकनीक के संगम से नया इतिहास रचेंगी। जिला प्रशासन की अनूठी पहल पर शहर में एक भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 550 उन्नत ड्रोन एक साथ आकाश में अपनी चमक बिखेरेंगे। इस शो की मुख्य विशेषता लेजर लाइटिंग और बड़ी स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाली मुंगेर की गौरवशाली विरासत होगी। आसमान में ड्रोन की कतारें मुंगेर किला, योग नगरी और यहां के पौराणिक स्थलों की आकृतियां उकेरेंगी। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को जिले के समृद्ध इतिहास से रूबरू कराना है। शाम ढलते ही शुरू होने वाले इस शो को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

सामान्य प्रश्न

मुंगेर पदार्पण दिवस कब मनाया जाएगा?
मुंगेर पदार्पण दिवस 6 मई 2026 को मनाया जाएगा।

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