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मुंगेर

गेहूं उत्पादन का 11% खरीदती है सरकार, बाकी बिचौलियों का बाजार

हिन्दुस्तान टीम,मुंगेरPublished By: Newswrap
Mon, 31 May 2021 04:31 AM

गेहूं उत्पादन का 11% खरीदती है सरकार, बाकी बिचौलियों का बाजार

मुंगेर | नगर संवाददाता

गेहूं का एमएसपी 1975 रुपया निर्धारित है। जिले का हर किसान चाहता है कि उसका गेहूं सरकार खरीदे, लेकिन सरकार ने मुंगेर में गेहूं के कुल उत्पादन का 11 प्रतिशत ही खरीद करने का लक्ष्य रखा है। जिस कारण किसानों को अपने अनाज का सरकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण यहां के किसान बिचौलियों को औने-पौने दाम में अपना अनाज बेचने को विवश हैं।

जानकारी के अनुसार मुंगेर में 22 हजार से अधिक हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। जिसमें लगभग 63 हजार 617 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। लेकिन सरकारी स्तर पर गेहूं खरीद का लक्ष्य मात्र 7000 टन रखा गया है। जिस कारण बाकी के गेहूं को किसान बिचौलियों के हाथ बेचने को मजबूर है। सरकारी निर्णय का एक मजेदार पहलू यह भी है कि 7000 टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन जिले में भंडारण क्षमता उससे कम है। जिले में 22 हजार 992 हेक्टेयर से अधिक रकवा में गेहूं की खेती होती है। जिसमें इस वर्ष 63 हजार 617.65 टन गेहूं की अनुमानित उपज हुई है। लेकिन सरकारी अस्तर पर पैक्स और व्यापार मंडल द्वारा महज 2488.2980 टन ही गेहूं खरीद की गई है। जानकारी के अनुसार सरकार ने पैक्स और व्यापार मंडल के द्वारा किसानों से 1975 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। लेकिन जिले भर में इस स्तर पर मात्र सात हजार टन ही गेहूं की खरीद होनी है। लेकिन अभी तक जिले भर में 622 किसानों से अब तक मात्र 2488.2980 टन ही गेहूं की खरीद हो पाई है। यानी उपज का मात्र 11 प्रतिशत और लक्ष्य का लगभग 35 ही गेहूं की खरीदारी हुई है। जिले के बाकी किसानों को अब मजबूरन खुले बाजार में 1600-1700 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेचना पड़ रहा है।

गौरतलब हो कि गेहूं खरीद के लिए जिले में कुल 50 पैक्स और व्यापार मंडल का चयन किया गया है। बाकी के अन्य पैक्स से संबद्ध पैक्स हैं। सहकारिता विभाग का कहना है कि सभी पैक्स में खरीदारी हो रही है। जबकि 15 जून तक ही पैक्स और व्यापार मंडल के स्तर पर गेहूं की खरीदारी होनी है। इसके बाद यह प्रक्रिया बंद हो जाएगी। किसानों को पैक्स में गेहूं बेचने के लिए किसानों के पास किसान का पंजीयन, बैंक पासबुक और किसान के नाम से रसीद होनी जरूरी है। तभी किसान अपना गेहूं पैक्स को दे सकते हैं। कई प्रक्रिया के बाद करीब 15 दिनों के बाद बोरा गोदाम पहुंचता है। जहां नंबर आने पर ही गोदाम में बोरा उतारा जाता है। स्थिति यह है कि भंडारण क्षमता दुरुस्त नहीं रहने के कारण पैक्स से अनाज भरकर लाए गए ट्रक को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं कई पैक्सों को एसएससी के द्वारा बोरा सील करने या कागजी प्रक्रिया पूरा करने के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है जिस कारण गेहूं पैक्स के ही गोदाम में पड़ा हुआ है। जबकि एसएफसी द्वारा गेहूं रिसीव करने के बाद ही एसएफसी के द्वारा राशि का बैंकों के माध्यम से भुगतान किया जाता है। गकस प्रखंड में कितनी समितियों को क्या दिया गया है लक्ष्य और लक्ष्य के अनुरूप में कितना किया गया है क्रय का आंकड़ा टन में

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