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1 अक्तूबर, 2020|5:58|IST

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नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान आरंभ

नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान आरंभ

चार दिनी लोक उपासना का महापर्व छठ गुरुवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। आज यानि शुक्रवार को खरना होगा। व्रती शाम में खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। दो नवंबर शनिवार को अस्ताचलगामी और तीन नवंबर रविवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होगा। इस उपलक्ष्य में घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। कहीं महिलाएं समूह में बैठ कर गा रही हैं तो कहीं सीडी पर गीत बज रहे हैं। छठ के पारंपरिक मधुर गीत केरवा जे फरेल घवद से ओह पर सुगा मंडराय... कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी चलकत जाय... हमहूं अरघिया देबई हे छठी मइया... गूंजने लगे हैं। इस महापर्व की तैयारी में हर कोई व्यस्त है। महापर्व को लेकर व्रतियों के घरों में पूजन सामग्री की सूची बन चुकी है। परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग काम की जिम्मेवारी सौंपी गई है। गुरुवार को व्रती नहाने के बाद अरवा चावल का भात, चने की दाल और लौकी की सब्जी घर-घर बना। इसके बाद व्रती के बाद घर के लोगों ने इसे ग्रहण किया। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व अत्यंत कष्टसाध्य है किंतु अपार फलदायी है। अनुष्ठान के पहले दिन कद्दू भात को लेकर सुबह से ही शहर के विभिन्न गंगा तटों पर छठव्रतियों की भीड़ स्नान के लिए उमड़ पड़ी। शहर सहित दूरदाराज के छठव्रती गंगा स्नान करने एवं जल भरने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। सैकड़ों व्र्रती गंगाजल भरकर अगले दिन के अनुष्ठान के लिए ले जाते दिखे। व्रती कांचहि बांस के बहंगिया, बंहगी लचकत जाय, बंहगी घाटे पहुंचाये... जैेसी छठ गीतों से गंगा तटों को गुंजायमान कर रहे थे। इधर नहाय खाय को लेकर गंगा स्नान करने एवं जल भरने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह से ही जारी था। जो लगभग 3 बजे दोपहर तक चलता रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने शहर के विभिन्न गंगा तटों पर डूबकियां लगायी। अहले सुबह से ही गंगातटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी।

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  • Web Title:Four-day ritual begins with Nahay-Khay